बड़ा सवाल
1_क्या कोई टेंडर लगाने से पहला पार्षदों की सहमति नहीं ली जाती ?
2_क्या नगरपालिकाओं में मनमर्ज़ी के काम किए जाते है ?
Shivpuri News : शिवपुरी नगरपालिका में पॉलीथिन का मामला सामने आया है जिस को लेकर नगर पालिका के कर्मचारी चुप चाप एक दूसरे की तरफ मुंह ताकते दिखे। > जैसे चोर की दांडी में तिनका ।
शिवपुरी। शिवपुरी नगरपालिका के अजीब कारनामे सामने आते है
मिली जानकारी अनुसार हम आप को बता दें कि कुछ समय पहले लगभग 80 टन पॉलीथिन शिवपुरी शहर में पकड़ कर जप्त गई थी जिसे शिवपुरी नगरपालिका में रख दी थीं
जिसे विनष्टि कारण करने के लिए शिवपुरी नगरपालिका ने एक विज्ञप्ति निकालकर टेंडर निकाला जिसमें चार लोगों ने फॉर्म भरे जिसमे एक का टेंडर वन kg,7.1 दर के हिसाब से पास हो गया और उसे टेंडर दे दिया गया आज दिनांक को उस पॉलीथिन को ठेकेदार द्वारा भरने वाहन पहुंचाया और लेवर द्वारा वाहन को भर कर निकाल ही रही थे कि उसे समय वहां कुछ लोगों द्वारा विरोध किया गया ।
जिस को लेकर कर्मचारियों ने अपना सिर नीचे करते हुए वाहन को रुकवा दिया और पॉलीथिन को वाहन से उतारवा कर वापिस रख दिया ।
नगरपालिका में आम जन देख बड़े परेशान हुए _
सब के मन में एक ही सवाल
क्या यह गाड़ी में जो पॉलीथिन भर कर ले जा रहे बो चोर थे या
नगरपालिका के अधिकारियों, कर्मचारियों की मिली भगत से चोरी करवाई जा रही थी ।
इधर
पार्षदों का कहना है कि कम रेट में टेंडर दिया गया है जिससे नगरपालिका की आर्थिक आर्थिक छति होगी इसलिए इसको रुकवा कर हमने आपत्ति पेश की है
हालांकि को पार्षदों द्वारा नारपालिका में आकर आपत्ति भी दर्ज करा दी गई है ।
जब संबंधित अधिकारी कर्मचारियों से पूछ ताछ करने की कोशिश की सीएमओ साहब ने फोन नहीं उठाया ऑर कर्मचारियों ने स्टेटमेंट देने से इनकार कर दिया ।
मनो कही ना कही भ्रष्टाचार हुआ है

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