शिवपुरी। एक तरफ सरकार 'बेटी बचाओ' और महिला सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ शिवपुरी जिले के बामौरकलां थाना क्षेत्र से आई यह खबर कानून व्यवस्था और खाकी की कार्यशैली पर गहरे सवाल खड़े करती है। हायर सेकेंडरी स्कूल के पास रहने वाली एक महिला ने स्कूल के ही शिक्षक मुकेश कुमार शर्मा पर घर में घुसकर छेड़छाड़, मारपीट, अश्लील हरकतों और जातिसूचक गालियां देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। उससे भी ज्यादा शर्मनाक पहलू यह है कि न्याय की आस में थाने पहुंची पीड़िता को बामौरकलां पुलिस ने मदद देने के बजाय डांटकर भगा दिया।
दो महीने से प्रताड़ना, विरोध करने पर सड़क पर पटका पुलिस अधीक्षक को सौंपे गए शिकायती आवेदन के अनुसार, पीड़िता का घर स्कूल की बाउंड्री से सटा हुआ है। आरोपी शिक्षक मुकेश कुमार शर्मा पिछले दो महीनों से पीड़िता को अश्लील इशारे कर प्रताड़ित कर रहा था। बुधवार सुबह 10 बजे जब महिला ने हिम्मत जुटाकर आरोपी की हरकतों का विरोध किया, तो शिक्षक का अहंकार भड़क उठा। आरोपी ने अपनी गाड़ी रोकी, महिला के साथ झूमाझपटी की, थप्पड़ मारे और उसे जमीन पर पटक दिया, जिससे महिला को अंदरूनी चोटें आईं। इसके बाद आरोपी शिक्षक स्कूल के भीतर से पीड़िता को जातिसूचक गालियां और अपनी 'ऊंची पहुंच' की धमकियां देने लगा।
डायल 100 और थाने का रवैया: पीड़िता को ही जेल भेजने की धमकी! मामले में पुलिस का रवैया निष्पक्षता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। आरोपी शिक्षक ने खुद को बचाने के लिए डायल 100 बुलाई। मौके पर पहुंची पुलिस ने पीड़िता का पक्ष सुनने के बजाय उलटे उसी को डराना-धमकाना शुरू कर दिया कि अगर मास्टर के खिलाफ मुंह खोला, तो झूठे केस में जेल भेज देंगे। जब पीड़िता बामौरकलां थाने पहुंची, तो वहां भी उसे फटकार कर भगा दिया गया। खाकी के इस रवैये से आहत पीड़िता ने पुलिस पर साठगांठ का सीधा आरोप लगाया है।
एसपी से गुहार, अब उच्च अधिकारियों के फैसले पर टिकी नजरें स्थानीय पुलिस से न्याय न मिलने पर पीड़िता ने जिला पुलिस अधीक्षक की चौखट पर दस्तक दी है और आरोपी शिक्षक के खिलाफ छेड़छाड़ व एससी-एसटी एक्ट (SC-ST Act) की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज करने की गुहार लगाई है।
गुरु-शिष्य की परंपरा को तार-तार करने वाले ऐसे शिक्षकों पर आखिर विभागीय कार्रवाई कब होगी? और पीड़िता की फरियाद सुनने के बजाय आरोपी की ढाल बनने वाले पुलिसकर्मियों पर क्या कार्यवाही की जाएगी? अब देखना यह है कि पुलिस प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष जांच कर न्याय दिलाता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।


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