भोपाल कोरोना महामारी के दौरान जब हमारी जरूरत थी तो हम लोगों से काम करा लिया और अब हमें निकाला जा रहा है। अप्रैल 2020 में कोविड-19 वैश्विक महामारी के तहत विभागीय नियमानुसार एवं पूर्ण मापदंडों के मुताबिक प्रशिक्षण देने के बाद तीन माह के लिए स्वास्थ्यकर्मियों को नियुक्ति की गई थी, जिसे समय-समय पर वैश्विक महामारी के प्रकोप को देखते हुए 9 माह तक लगातार बढ़ाया जाता रहा है। अब निकाला जा रहा है। हमें स्थायी नियुक्ति दी जाए या संविदा पर रखा जाए। कुछ इस तरह की मांग गुरुवार को मप्र कोविड-19 स्वास्थ्य संगठन के सदस्यों द्वारा नीलम पार्क में धरना-प्रदर्शन करते हुए रखी। इस धरना-प्रदर्शन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए करीब 1200 स्वास्थ्यकर्मी शामिल हुए।
स्वास्थ्यकर्मियों ने कहा कि कोविड-19 के समय हम पॉजिटिव मरीजों के सीधे संपर्क में रहते हुए इलाज एवं सेवाएं देते रहे हैं। इस दौरान सभी ने अपने घर को त्याग कर सेवाएं दीं, जिसमें कई कर्मचारी कोरोना पॉजिटिव हुए तो कई की जान भी गई। फिर भी स्वास्थ्यकर्मियों ने अपनी सेवाएं दीं। इस तरह उज्जैन कुंभ मेले में सन् 2016 में तीन माह के लिए 2700 सुरक्षाकर्मियों को अस्थायी रूप से नियुक्त किया गया था। इसके बाद उन्हें स्थायी नियुक्ति दी गई। स्वास्थ्यकर्मियों ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से निवेदन किया है कि विकट परिस्थितयों में खुद अपनी और अपने परिवार की जान जोखिम में डालकर किए गए कार्य का ध्यान में रखते हुए अनुबंध को हमेशा के लिए समाप्त कर स्थाई नियुक्तियां दी जाएं। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र कुशवाहा ने कहा कि अगर हमारी नियुक्ति निरस्त कर दी जाती है तो हम बेरोजगारों की श्रेणी में आ जाएंगे। वहीं प्रफुल्ल यादव ने कहा कि जब शासन को हमारी जरूरत थी तो हमारी सेवाएं लीं और अब आधे स्वास्थ्यकर्मियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। शासन का यह रवैया ठीक नहीं है।

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