भोपाल कोरोना काल के कारण दस माह बाद शनिवार को नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस बार लोक अदालत का नजारा थोड़ा बदला हुआ नजर आया। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए सभी जरूरी एहतियात बरते गए थे। पक्षकार व वकील सभी मास्क पहने नजर आए। मुख्य द्वारा पर सभी के हाथ सैनिटाइज कर अंदर प्रवेश दिया गया। कोर्ट कक्ष में भी सुरक्षित शारीरिक दूरी का पालन किया गया। इस बार समझौते के बाद न तो दंपती ने एक-दूसरे को माला पहनाई। इस बार दंपती को पौधे भी भेंट नहीं किए गए। कुटुंब न्यायालय में 42 मामलों में समझौता हुआ। इस दौरान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेंद्र कुमार वर्मा ने सुरक्षा व्यवस्था का जायजा भी लिया। न्यायाधीश द्वारा समझाइश देने के बाद कई दंपती एक साथ रहने को राजी हुए। एक मामले में पांच साल की शादी में पत्नी बीते दो साल से पति से अलग मायके में रह रही थी। पत्नी की एक ही जिद थी कि पति उसका और उसके बच्चों का खयाल रखने में सक्षम नहीं है। पत्नी चाहती थी कि पति घर जमाई बनकर रहे। मामले में पति ने लिखित में दिया कि वह पत्नी और बच्चों की पूरी जिम्मेदारी उठाएगा। पति की बात मानते हुए पत्नी ने भी लिखकर दिया कि अब उनके परिवार के मामले में मायके वाले हस्तक्षेप नहीं करेंगे। इसके बाद दंपती एक साथ घर के लिए रवाना हुए।
दोनों घर वालों से अलग रहने जाओ
शादी के तीन साल बाद एक दंपती के बीच विवाद बढ़ गया था। मामले में पत्नी की शिकायत थी कि ससुराल वाले प्रताड़ित करते हैं। वह पति के साथ अलग रहना चाहती है। पति का कहना था कि मायके वाले उसकी पत्नी को भड़काते हैं। इसके बाद जज ने पति से कहा कि दोनों अपने-अपने घर से अलग 25 किमी दूरी पर किराये का मकान लेकर एक साथ रहो। इसके बाद पति-पत्नी एक-दूसरे के साथ गए।
पति के गुस्से से लगता है डर
एक अन्य मामले में पत्नी ने कहा कि वह पति से बेहद डरती है और इसलिए जब भी पति डांटते हैं तो वह घर छोड़कर निकल जाती है। इस संबंध में मंत्रालय में कार्यरत पति का कहना था कि यदि वह गुस्सा कर भी देता है तो घर छोड़कर निकल जाने का क्या मतलब है। इस दंपती की शादी को दस साल हो गए हैं और उनकी दो जुड़वा बेटियां हैं। मामले में न्यायाधीश और काउंसलर ने पत्नी को समझाया कि इस तरह डरना ठीक नहीं। वहीं पति को समझाइश दी कि वह भी अपने गुस्से पर काबू पाना सीखे। बच्चों की खातिर दंपती एक साथ रहने को तैयार हुए।

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