भोपाल रेल डिपो में शुक्रवार सुबह आउटसोर्स कर्मचारियों ने ट्रेनों की सफाई का काम अचानक बंद कर दिया। ये कर्मचारी ठेकेदार द्वारा भुगतान नहीं करने से नाराज थे। इनका कहना था कि ठेकेदार वेतन के लिए परेशान करता है। काफी समझाइश और ठेकेदार द्वारा जल्द भुगतान करने के आश्वासन के बाद सुबह 11 बजे कर्मचारी वापस काम पर लौटे।
भोपाल रेलवे डिपो में काम करने वाले आउटसोर्स कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें आठ से दस हजार रुपये मिलते हैं। उसमें भी ठेकेदार कई तरह की कटौती कर लेता है। बीते एक महीने का भुगतान जबरन रोककर रखा है। हम परेशान हो गए हैं। ठेकेदार को काम बंद करने की चेतावनी भी दी थी। तब वह कहने लगा कि काम करना है तो करो, नहीं तो बंद कर दो। इस पर हमें काम बंद करना पड़ा। सुबह आठ बजे से सुबह 11 बजे तक काम नहीं किया तो रेलवे के अधिकारियों ने बुलाया था। ठेकेदार से भी बात की है। इस पर वह भुगतान जल्द करने पर राजी हो गया है, इसलिए हमनें काम चालू कर दिया है
यदि ठेकेदार ने तय समय में वेतन नहीं दिया तो दोबारा काम बंद करके धरने पर बैठे जाएंगे। आउटसोर्स कर्मचारियों का कहना है कि जब भी वे शिकायत करते हैं या आवाज उठाते हैं तो उन्हें ठेकेदार धमकाता है और नौकरी से बाहर करने की चेतावनी देता है। इस वजह से वे लिखित में रेलवे के अधिकारियों को शिकायत भी नहीं कर पा रहे हैं। भोपाल रेल मंडल के अधिकारियों ने रेलवे डिपो में काम बंद होने की पुष्टि की। यह भी कहा कि आउटसोर्स कर्मचारी मान गए हैं और काम पर लौट गए हैं। ठेकेदार की तरफ से कहा गया कि उसे रेलवे ने भुगतान करने में देरी कर दी है, इसलिए वह कर्मचारियों के वेतन का भुगतान नहीं कर पा रहा है।
बता दें कि भोपाल रेलवे डिपो से भोपाल-दुर्ग अमरकंटक एक्सप्रेस, भोपाल-प्रतापगढ़ एक्सप्रेस, विंध्याचल एक्सप्रेस समेत अन्य ट्रेनें बनकर चलती हैं। शुक्रवार शाम 4 बजे अमरकंटक एक्सप्रेस के चलने का समय है। आउटसोर्स कर्मचारियों द्वारा काम बंद करने की वजह से इस ट्रेन की साफ-सफाई प्रभावित हुई थी, जिसे बाद में प्राथमिकता में पूरा कराया गया है।

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