ग्वालियर कोरोना संक्रमण के शिकार लोगों की इलाज के दौरान हुई मौतों के मामले में कराए जा रहे स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में मरने वालों की संख्या को लेकर गफलत है। कारण, अभी तक जिले में कोरोना से कितनी मौतें हुईं, इसके सही -सही आंकड़े प्रशासन के पास उपलब्ध नहीं हैं। दूसरी लहर के साढ़े तीन (3.5) माह में ही 910 लोगों की मौत हुई। लेकिन सरकारी आंकड़ों में सिर्फ 392 ही दर्ज की गईं।
इतना ही नहीं पूरे कोविड काल में 622 मौत बताई गईं जबकि 1219 मरीजों (प्राइवेट, सरकारी और श्मशान घाट में कोविड प्रोटोकॉल के तहत हुए अंतिम संस्कार) की मौत कोरोना से हुई। नतीजा, डेथ ऑडिट रिपोर्ट आने के बाद कई नाम मौत के एक से डेढ़ माह बाद भी नहीं जोड़े जा रहे हैं। सौ से अधिक मरीजों की मौत के मामले में डेथ ऑडिट रिपोर्ट ही पेंडिंग हैं, जबकि निजी अस्पतालों में दम तोड़ने वाले कई मरीजों का प्रशासन पर रिकार्ड ही नहीं पहुंचा है। इसी तरह इलाज के दौरान दिल्ली, एनसीआर में दम तोड़ने वाले ग्वालियर के मरीजों की जानकारी भी प्रशासन को नहीं है।
प्रशासन यह नहीं बता रहे कि किस अस्पताल में कितने मरीजों की मौत हुई। पूरे कोविडकाल की बात करें तो सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में कोविड से 960, जिला अस्पताल में 104 और सिविल अस्पताल हजीरा में 5 लोगों की मौत हुई है। निजी अस्पतालों में इलाज के दौरान दम तोड़ने वालों का आंकड़ा भी करीब 250-300 का है। इनमें कई मरीज बाहर के हैं।
कोविड मौत को लेकर प्रशासन के दोहरे मापदंड
कोविड पॉजिटिव ही नहीं उनकी मौत को लेकर भी प्रशासन के दोहरे मापदंड रहे हैं। विधायक प्रवीण पाठक भोपाल में संक्रमित निकले थे लेकिन उनकी गिनती ग्वालियर के रिकॉर्ड में नहीं की गई। ग्वालियर में पॉजिटिव निकले भिंड, मुरैना के मरीजों को दूसरे जिले का बताकर रिकॉर्ड में नहीं जोड़ा। इसी तरह उप नगर ग्वालियर निवासी राजकुमार की 17 जून 2020 को सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में इलाज के दौरान मौत हुई थी। राजकुमार को किडनी संबंधी परेशानी थी जिसके इलाज के लिए वे दिल्ली गए थे। वहां सैंपल देने के बाद उन्हें वापस भेज दिया गया था।
दिल्ली में उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई जिसकी सूचना मिलने पर परिजन ने उन्हें सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया था जहां उनकी मौत हो गई थी। राजकुमार की मौत ग्वालियर के रिकॉर्ड यह कहकर नहीं जोड़ी गई कि उन्होंने दिल्ली में सैंपल दिया है। वहीं दूसरी ओर 16 मई को मुंबई से ट्रक में सवार होकर गाजीपुर जा रहे सुरेंद्र सिंह, सीता सहित 25 लोग गुना में सड़क हादसे में घायल हो होकर जेएएच में भर्ती हुए थे। इसमें सुरेंद्र और ज्योति की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। इन्हें ग्वालियर में नहीं जोड़ा गया।
मई में जितने अंतिम संस्कार, सरकारी रिकॉर्ड में उससे भी कम की मौत
इस साल मई में सबसे अधिक 520 लोगों की मौत हुई थी। अप्रैल में मरने वालों की संख्या 362 थी। पहली लहर में सबसे अधिक 104 लोग सितंबर में मरे थे। अगर सरकारी आंकड़ों की बात की जाए तो इस साल अप्रैल में 235 और मई में 138 मरीजों की ही मौत इलाज के दौरान हुई है। पिछले दो माह की शहर के कब्रिस्तान और श्मशान घाटों में अप्रैल में 1178 का अंतिम संस्कार हुआ। इसमें 565 कोविड प्रोटोकॉल के तहत तथा 613 नॉन कोविड मानकर अंतिम संस्कार किया गया। मई में 1147 का अंतिम संस्कार हुए। इनमें से 628 कोविड तथा 519 नॉन कोविड माना था। इनमें कई मरीज ग्वालियर से बाहर के थे।
मरने वालों में 43 फीसदी थे डायबिटीज के शिकार
कोविड से मरने वालों में मरने वालों में करीब 24 फीसदी यानी 292 लोग हृदय संबंधी बीमारी के शिकार थे। 43 फीसदी यानी 525 डायबिटीज के। 33 फीसदी यानी 402 लोगों को ब्लडप्रेशर की शिकायत थी। इनमें भी 20 से 22 फीसदी यानी 243 से 268 मरीज ऐसे थे जिन्हें ब्लडप्रेशर, डायबिटीज, हृदय संबंधी, किडनी व अन्य गंभीर बीमारियां भी थीं। बीते दो माह, अप्रैल और मई में ऑक्सीजन की किल्लत के कारण मची अफरा-तफरी में 12 लोगों की मौत हुई थी।
डेथ ऑडिट जल्द पूरा कराएंगे
कोविड मरीजों की मौत की डेथ ऑडिट का काम जल्द से जल्द पूरा करने के मेडिसिन के विभागाध्यक्ष को निर्देश दिए जाएंगे।
-डॉ. समीर गुप्ता, डीन जीआरएमसी
डेथ ऑडिट से सामने आएगी तस्वीर
सीएमएचओ से कहा जाएगा कि डेथ ऑडिट का काम जल्द से जल्द पूरा कराया जाए, ताकि सही तस्वीर सामने आ सके।
-कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर
डेथ ऑडिट रिपोर्ट के हिसाब से दर्ज कर रहे हैं मृतकों की संख्या
हमारे पास जैसे-जैसे डेथ ऑडिट रिपोर्ट आती जा रही है मृतकों के नाम रिकार्ड में दर्ज किए जा रहे हैं।


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