डाक विभाग की बचत योजनाओं में लोगों से धोखाधड़ी के मामले में टाउनहाल उपडाकघर के एजेंट व सहयोगी निजी कर्मचारी को गिरफ्तार किया है। एजेंट डाकघर से सहयोगी कर्मचारी को विभाग की सील लगी पासबुक पर खाता खोलकर रकम जमा कर रहा था। 2015 से अब तक लगभग 5 करोड़ रु. की ठगी का मामला सामने आया है।
शनिवार को एसपी शैलेंद्रसिंह चौहान ने मामले का खुलासा किया। उन्होंने बताया ठगी के मामले में टाउनहाल शाखा के मास्टरमाइंड एजेंट दीपेश रमेशचंद्र भटोरे (42) निवासी रवींद्रनगर हाल मुकाम कृष्णकुंज व जगदीश पिता मांगीलाल काग (39) निवासी गांधीनगर को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों ने डाक घर के समानांतर एक फर्जी वित्तीय संस्थान संचालित कर फर्जीवाड़ा किया।
लोगों को विश्वास में लेकर घर बैठे सेवा देकर 2015 से अब तक करीब 5 करोड़ रुपए की रकम इसे डाक विभाग में जमा न कराकर खुद वसूल कर ली। एजेंट दीपेश डाकघर से पासबुक ला रहा था। जगदीश उस पर इंट्री कर लोगों से हर माह रकम जमा कर रहा था।
रेकरिंग डिपाजिट व फिक्स डिपाजिट की 5 साल की अवधि पूरी होने पर रकम न मिलने पर लोगों ने शिकायत की। पुलिस ने जांच कर धोखाधड़ी व कूट रचित दस्तावेज तैयार करने का केस दर्ज किया। पूछताछ में उसने एजेंट दीपेश की मदद से ठगी करना स्वीकारा। 30 से ज्यादा में फर्जी साइन की हुई पासबुक जब्त की है।
कर्ज चुकाकर मकान बनाया, कार व ट्रैक्टर खरीदे, पुलिस ने वाहनों को किया जब्त
आरोपियों ने लोगों से बचत योजनाओं में जुटाई रकम से एजेंट दीपेश ने कर्ज चुकाया। वाहन व मकान निर्माण में खरीदी। आरोपी जगदीश ने लोगाें से ठगी रकम से 5 लाख रुपए का बोलेरो वाहन व 2.50 लाख रुपए का ट्रैक्टर खरीदा। मजे से जीवनयापन कर रहे थे। पुलिस ने वाहन जब्त कर लिए हैं।
पत्नी ने दर्ज कराई थी गुमशुदगी, जांच में निकली धोखाधड़ी
एसपी के मुताबिक 27 मई को कोतवाली पुलिस में उर्मिलाबाई निवासी गांधीनगर ने शिकायत की कि उनका पति जगदीश घर से बिना बताए कहीं चला गया है। उस पर गुमशुदगी दर्ज की गई। जांच में पता चला कि जगदीश पोस्ट ऑफिस खरगोन में एजेंट मोहन चांदोरे की देखरेख में काम करता था।
उसने डाक विभाग की योजनाओं में लोगों से काफी रकम लेकर धोखाधड़ी की है। पीड़िता पार्वतीबाई पति सीताराम सोनी निवासी कुंदानगर ने शिकायत की। इसके बाद 25 से ज्यादा पीड़ितों ने आवेदन दिए। जगदीश महाराष्ट्र भाग गया था। जैसे ही वह घर लौटा पुलिस ने दबोच लिया।
मैच्योर पासबुक के कॅवर को दोबारा करते थे इस्तेमाल
इस मामले का सबसे पहले दैनिक भास्कर ने 13 जून को खुलासा किया। मैच्योर पासबुक के कॅवर को निकालकर नई पासबुक तैयार कर लेते थे। उसका दोबारा इस्तेमाल कर लेते थे। मास्टरमाइंड दीपेश की इसमें बड़ी भूमिका होती थी। डाक विभाग में योजनाओं के नाम पर लोगों से धोखाधड़ी 15 साल से चलने की जानकारी सामने आ रही है।
इन योजनाओं में की ठगी
- फिक्स डिपाजिट व रेकरिंग डिपाजिट।
- मंथली इनकम स्कीम।
- नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट
- किसान विकास पत्र
- सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम
- सावधि जमा
वित्तीय धोखाधड़ी से बचने के लिए पुलिस ने जारी की एडवायजरी
- वित्तीय लेनदेन एजेंट पर ज्यादा भरोसा न कर खुद जमा-निकासी करें।
- वित्तीय गड़बड़ी की शंका पर पुलिस को सूचित करें।
- बड़ी रकम की जमा-निकासी पर संस्था प्रमुख सें जरूर मिलें।
- सामान्यत: वित्तीय संस्था प्रमुख से साल में 2 बार मिलें।
- सीनियर सिटीजन के साथ परिवार का सदस्य लेनदेन करने साथ जाएं।
डाककर्मी व अन्य एजेंट की जांच जारी
डाक विभाग की बचत योजनाओं में करीब 5 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी पर मास्टरमाइंड एजेंट व उसके सहकर्मी को गिरफ्तार किया है। अन्य डाककर्मियों व अन्य एजेंट की भूमिका की जांच चल रही है

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