- ग्वालियर से शिवपुरी तक नदी वाले हर प्वाॅइंट पर स्थिति खराब, 124 किमी के 3 क्षेत्रों में हालत खराब
- जलस्तर नीचे उतरने से घर जाने की राहत जरूर मिली लेकिन नुकसान और दूसरी परेशानियां अब भी मौजूद
अतिवर्षा से नदियों में आए उफान का पानी अब बेशक उतरने लगा है और बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में लोग पलायन से वापस अपने घरों की तरफ रुख कर रहे हों। लेकिन ये बाढ़ उनके जीवन से बहुत कुछ ले गई और तमाम सारी परेशानियां दे गई। इन परेशानियों से ही इन लोगों की जिंदगी पिछले 3 दिन से दो-दो हाथ कर रही है।
दैनिक भास्कर रिपोर्टर और फोटोग्राफर ने मोहना, सेंवढ़ा से पाढरखेड़ा तक लोगों के बीच पहुंचकर हालात जाने। हकीकत यह है कि लोग भूखे पेट, टूटे घरों में जूझते हुए 3 दिन से जिंदगी और मौत के बीच फंसे हैं। इन लोगों तक न तो अफसर पहुंचे हैं और न ही सरकारी मदद। खेतों में खड़ी मूंगफली, सोयाबीन, धान, मिर्ची, बाजरा की फसलें बर्बाद हो चुकी हैं। बिगड़े हालातों से लड़कर लोग अपने पड़ोसी और परिचितों के माध्यम से जिंदगी को वापस पटरी पर लाने की जद्दोजेहद में जुटे हैं।
मोहना: 30 घंटे बाद उतरा पानी कपड़े-राशन कुछ नहीं बचा
मोहना में अपर ककैटो से छोड़ा पानी व पार्वती नदी के उफान ने मंगलवार शाम 5 बजे से हालात बिगाड़ने शुरू कर दिए। पार्वती नदी के किनारे के गांव और मोहना नगर के दर्जनों मकानों में बुधवार शाम तक कई फीट तक पानी भरा रहा। लोग अपने घरों को छोड़कर करई-रानीघाटी रोड पर दूसरे लोगों के यहां पनाह लिए रहे।
फिर बुधवार रात से जब पानी उतरना शुरू हुआ तो लोगों ने अपने घरों की तरफ रुख किया। लट्टूराम धाकड़ (70) ने बताया कि पिछले 30 साल में मैंने कभी ऐसी तबाही यहां नहीं देखी। हम लोगों को मकान छोड़ना पड़ा, तब जान बची। अब मकान में कहीं बड़े गड्ढे हो गए हैं तो कहीं से दीवारें चटक चुकी हैं। अब वापस आए हैं तो न घर में राशन बचा है न कपड़े और अब तक प्रशासन की तरफ से भी किसी ने सुध नहीं ली।
पाढरखेड़ा: खेतों में भरा पानी, मिर्ची की फसल हुई बर्बाद
सेंवढ़ा से आगे बसे शिवपुरी के पाढरखेड़ा गांव में पहाड़ी क्षेत्रों से पानी आने का सिलसिला अब भी जारी है। साथ ही यहां गुरुवार को भी तेज बारिश हुई। दो तरफ से आ रहे इस पानी ने ग्रामीणों की परेशानी काफी बढ़ा रखी है। बुधवार को यहां पानी का बहाव इतना तेज था कि ग्वालियर-इंदौर रेलवे ट्रैक के नीचे से पूरा मटेरियल बह गया और ट्रैक हवा में झूल रहा है।
यहां रहने वाले राकेश धाकड़ ने बताया कि गांव के कई घरों में बुधवार को पानी भर गया था। जो देर रात तक निकल गया। लेकिन ऐसा फिर होने का भय सभी में बना हुआ है। इतना ही नहीं, गांव के खेतों में खड़ी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं। यहां के खेतों में मूंगफली, सोयाबीन व मिर्ची की फसल बड़ी मात्रा में खड़ी थी।

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