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SHIVPURI NEWS : जब 'कलेक्टर साहब' पहुँचे खेतों की चौपाल पर शिवपुरी जिले में कृषि क्रांति- ड्रोन और दफ्तर से बाहर निकलकर सीधे जमीन पर नवाचार का जायजा

AKHILESH VERMA   

SHIVPUEI NEWS _ आमतौर पर माना जाता है कि खेती-किसानी घाटे का सौदा है, लेकिन शिवपुरी के कुछ किसानों और जिला प्रशासन ने मिलकर इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है। जिले के कलेक्टर **श्री अर्पित वर्मा** ने आज वातानुकूलित दफ्तर छोड़कर खेतों का रुख किया। उनका मकसद साफ था—खेती को सिर्फ पेट भरने का जरिया नहीं, बल्कि 'मुनाफे का बिजनेस' बनाना।

आइए देखते हैं इस खास दौरे की 3 सबसे दिलचस्प कहानियां 

  बिजली का बिल ₹0 और पानी में तैरता मुनाफा!

कहाँ-बड़ागांव

 किसान श्री सुरेंद्र सिंह सेंगर

  क्या है खास यहाँ कलेक्टर ने देखा कि कैसे सरकार की सौर ऊर्जा नीति (90% सब्सिडी) का फायदा उठाकर किसान ने अपने खेत को आत्मनिर्भर बना लिया है। बिजली का कोई खर्च नहीं और खेत में ही शानदार मछली पालन।

 बड़ी बात  रासायनिक खादों को 'नो' कहते हुए यहाँ जीवामृत (जैविक खाद) से जमीन की सेहत सुधारी जा रही है।

 मिट्टी शिवपुरी की, खुशबू डच गुलाब की!

 कहाँ  ग्राम मुड़ेरी

 किसान  श्री अमित गुप्ता

  क्या है खास 8000 वर्ग मीटर में फैला एक हाईटेक पॉली हाउस (राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड से 50% अनुदान पर निर्मित)।

 नजारा  इसके आधे हिस्से (4000 वर्ग मीटर) में लाल-गुलाबी डच गुलाब लहलहा रहे हैं और बाकी आधे हिस्से में आधुनिक खीरे की खेती हो रही है। सिंचाई के लिए यहाँ इजरायली तर्ज पर 'माइक्रो स्प्रिंकलर' तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है।

कोकोपीट में फलतीं 'सुपर मिर्चियां

 कहाँ  ग्राम निबोदा (कोलारस)

 किसान  श्री गिरवर रावत

क्या है खास  यह कोई साधारण खेत नहीं, बल्कि पौधों का 'फाइव स्टार हॉस्पिटल' यानी आधुनिक नर्सरी है। यहाँ मशीनों के जरिए कोकोपीट (नारियल के बुरादे) में टमाटर, शिमला मिर्च और तीखी मिर्च की ऐसी पौध तैयार हो रही है, जिसमें बीमारी लगने का खतरा न के बराबर है।

तकनीक  यहाँ ड्रिप इरीगेशन और ऑटो-फर्टिलाइजेशन (कंप्यूटर तय करता है कि पौधे को कितना पानी और खाद चाहिए) सिस्टम देखकर कलेक्टर साहब भी तारीफ करने से खुद को रोक नहीं पाए।

कलेक्टर का कड़क संदेश 

अधिकारी सिर्फ दफ्तरों में न बैठें। इन प्रगतिशील किसानों को रोल मॉडल बनाएं और जिले के हर छोटे-बड़े किसान को इस हाईटेक खेती और सरकारी सब्सिडी से जोड़ें। जब किसान स्मार्ट बनेगा, तभी जिला आत्मनिर्भर बनेगा।

मौके पर मौजूद टीम  इस जमीनी दौरे में कलेक्टर के साथ कृषि विभाग के उपसंचालक श्री मुनेश शाक्य और उनकी पूरी एक्सपर्ट टीम मौजूद रही, जिन्होंने किसानों की समस्याओं को ऑन-स्पॉट सुना।

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