कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट श्री अर्पित वर्मा ने अंतर्विभागीय समन्वय बैठक में विभागीय कार्यों की समीक्षा की। बैठक में सीएम हेल्पलाइन, न्यायालयीन प्रकरण सहित विभिन्न विभागीय कार्यों पर चर्चा की गई। समीक्षा करते हुए कलेक्टर श्री वर्मा ने समस्त संबंधित विभागों के अधिकारियों को समय सीमा निर्धारित कर गुणवत्तापूर्ण कार्य करने के निर्देश दिए हैं।
बैठक में दस्तक अभियान के संबंध में भी निर्देश दिए गए हैं। मंगलवार 14 जुलाई से दस्तक अभियान की शुरुआत होगी और 31 अगस्त तक यह अभियान चलेगा। कलेक्टर श्री वर्मा ने इस अभियान को लेकर स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग को समन्वय से कार्य करने के निर्देश दिए हैं, ताकि इस अभियान को सफल बनाया जा सके।अभियान की निगरानी के लिए जिलाधिकारियों की ड्यूटीइस अभियान के तहत शतप्रतिशत बच्चों को कवर किया जा सके, इसके लिए अभियान की सतत निगरानी की जाएगी। कलेक्टर श्री अर्पित वर्मा ने विभिन्न विभागों के जिला अधिकारियों को भी निर्देशित किया है।जिलाधिकारी भी क्षेत्र में भ्रमण करेंगे और दस्तक अभियान की मॉनिटरिंग करेंगे। अभियान के लिए जिले में 42 सेक्टर बनाए गए हैं जिसमें सेक्टरवार निरीक्षण एवं निगरानी के लिए जिलाधिकारी की ड्यूटी निर्धारित की जाएगी।घर-घर जाकर जिंक और ओआरएस बांटेगी टीम,सीएमएचओ डॉ संजय ऋषिश्वर ने बताया कि अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर संपर्क करेंगी। इस दौरान बच्चों को जिंक की गोलियां और ओआरएस घोल के पैकेट वितरित किए जाएंगे। इसके साथ ही 5 साल तक के सभी छोटे बच्चों को घर-घर जाकर आयरन सिरप की एक-एक बोतल देने के निर्देश भी दिए गए हैं। आंगनवाड़ी केंद्रों पर भी दवा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं ताकि दवा का वितरण किया जा सके।बीएमओ को निर्देश, स्वास्थ्य कार्यक्रमों में सतत निगरानी करें और प्रगति लाएंकलेक्टर श्री अर्पित वर्मा ने बैठक में विकासखंड चिकित्सा अधिकारियों की समीक्षा की और निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत कई कार्यक्रम संचालित हैं, जिनकी सतत निगरानी की आवश्यकता है। उन्होंने एंबुलेंस संचालन की निगरानी के भी निर्देश दिए हैं।बैठक में एनीमिया मुक्त भारत अभियान, एएनसी रजिस्ट्रेशन आदि की भी समीक्षा की गई।एनआरसी में बच्चों को भर्ती कराने के निर्देशअति गंभीर कुपोषित बच्चों के लिए एनआरसी संचालित किया जा रहे हैं। कुपोषित बच्चों को चिन्हित कर एनआरसी में भर्ती कराया जाए और उनका बेहतर उपचार किया जाए। बच्चों को निर्धारित गुणवत्ता का भोजन उपलब्ध कराया जाए। महिला एवं बाल विकास विभाग के सभी परियोजना अधिकारी भी ध्यान दें। किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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