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Shivpuri News : आबकारी के 'कमीशन के खेल' में पिस रही जनता: ठेकेदारों से साठगांठ के चलते चुप है महकमा, अब महिलाओं ने संभाला मोर्चा

शिवपुरी | जिले भर के गांवों में धड़ल्ले से बिक रही अवैध शराब और उस पर आबकारी विभाग की रहस्यमयी खामोशी का असली सच अब उजागर होने लगा है। हम अपने समाचार पत्र/चैनल के माध्यम से लगातार आबकारी विभाग की नाकामी और सुस्ती पर सवाल उठाते आ रहे हैं, लेकिन विभाग टस से मस होने को तैयार नहीं है। दरअसल, इस पूरे मामले के पीछे शराब ठेकेदारों और आबकारी अफसरों के बीच चल रहा भारी-भरकम 'कमीशन का खेल' है। इसी हफ्ता वसूली और कमीशनखोरी के कारण आबकारी अमला माफियाओं पर कार्रवाई करने के बजाय आंखें मूंदकर बैठा हुआ है।

 कमीशन का खेल: गांवों को बनाया अवैध पैकारी का अड्डा

सूत्रों और ग्रामीणों की मानें तो आबकारी विभाग के संरक्षण में ठेकेदार गांवों के कोने-कोने में अवैध पैकारियां चलवा रहे हैं।

  • लाखों का लेनदेन: वैध दुकानों की आड़ में गांवों में अनधिकृत रूप से शराब भिजवाई जाती है। इस अवैध सप्लाई से उठने वाले भारी मुनाफे का एक तय हिस्सा कथित तौर पर आबकारी अमले तक 'कमीशन' के रूप में पहुंचता है।
  • कार्रवाई का नाटक: जब भी मीडिया में खबरें चलती हैं या जनदबाव बनता है, तो आबकारी विभाग ठेकेदारों को बचाने के लिए केवल कच्ची महुआ शराब बनाने वाले छोटे-मोटे लोगों पर कागजी कार्रवाई करके अपनी पीठ थपथपा लेता है। लेकिन मुख्य ठेकेदारों और उनकी अवैध पैकारियों पर हाथ डालने की हिम्मत विभाग नहीं जुटा पाता।

 जब बिक गया महकमा, तो सड़कों पर उतरीं सहरिया महिलाएं

आबकारी विभाग की इसी सांठगांठ और कमीशनखोरी से तंग आकर अब सहरिया समाज की महिलाओं ने खुद कानून अपने हाथ में लेने का मन बना लिया है। उन्हें समझ आ चुका है कि 'कमीशन' के नशे में धुत आबकारी विभाग से न्याय की उम्मीद करना बेमानी है।

एक के बाद एक 3 बड़े प्रहार:

  1. कफ़ार गांव: महिलाओं ने लट्ठ लेकर शराब माफियाओं के अड्डों को तहस-नहस किया।
  2. दविया कला: देशी व कच्ची शराब को सड़कों पर बहाकर आबकारी के खिलाफ बिगुल फूंका।
  3. चमरौआ (ताज़ा मामला): महिलाओं ने हिम्मत दिखाकर अवैध दुकान में घुसकर शराब की बोतलें सड़क पर पटक दीं।

 हफ्ता वसूली का नतीजा: उजड़ रहे परिवार

कमीशनखोरी के इस घिनौने खेल की कीमत गांव की गरीब जनता को चुकानी पड़ रही है:

  • घरेलू हिंसा और तंगी: पुरुषों की दिनभर की मजदूरी का पैसा शराब ठेकेदारों की जेब में जा रहा है, जिससे आए दिन घरों में मारपीट और कंगाली के हालात हैं।
  • बच्चों की पढ़ाई ठप: शराब के इस दलदल के कारण मासूम बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है।

 जनता के आबकारी विभाग से सीधे सवाल:

  1. यदि आबकारी की साठगांठ नहीं है, तो महिलाओं द्वारा शराब पकड़े जाने के बाद भी ठेकेदारों पर एफआईआर दर्ज क्यों नहीं होती?
  2. गांव-गांव चल रही अवैध पैकारियों का कमीशन आखिर किसकी जेब में जा रहा है?
  3. क्या वरिष्ठ अधिकारी इस 'कमीशन के खेल' की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषी आबकारी अमले और ठेकेदारों पर कार्रवाई की हिम्मत दिखाएंगे?

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