कश्मीरी। आर्टिकल 370 और 35ए निष्प्रभावी होने के बाद भले ही जम्मू-कश्मीर के हालात बदल गए हैं लेकिन कश्मीरी पंडित अभी वापसी को तैयार नहीं हैं. उनका कहना है कि जब तक वापसी के लिए सही रोडमैप नहीं बनेगा तब तक कश्मीरी वहां नहीं जाना चाहेंगे. कश्मीरी समिति दिल्ली के प्रेसीडेंट सुमीर च्रुंगू का कहना है कि यह कश्मीरी पंडितों का सातवां पलायन है. हमें मोदी सरकार पर विश्वास है लेकिन सुरक्षा, रोजगार और कामकाज की गारंटी चाहिए. इसके लिए नीति बनानी होगी वरना कोई वहां कैसे जाएगा.
च्रुंगू ने दावा किया कि देश में 7.5 लाख कश्मीरी पंडित हैं. उन्होंने कहा, कौन अपनी जमीन पर नहीं लौटना चाहता लेकिन उसके लिए एक रोडमैप तो देना ही होगा. हमारी जॉब, ट्रेडर्स के लिए काम और घर के बारे में सरकार कोई पॉलिसी ले आएगी तभी हम वापसी पर विचार करेंगे. कलस्टर में रहने के लिए कोई तैयार नहीं है, सब निजी घर चाहते हैं. जम्मू कश्मीर की अर्थव्यवस्था के आंकड़े बताते है कि हैं कि केंद्रीय योजनाओं के करीब दस प्रतिशत हिस्से के बराबर की रकम इसके 2000-2016 के बीच मिलती रही है, यद्यपि इसकी जनसंख्या पूरे देश की जनसंख्या की करीब एक प्रतिशत है.
आर्टिकल 370 निष्प्रभावी: मोदी सरकार के इस कदम से खुश हैं कश्मीरी पंडित
आर्टिकल 370 और 35ए निष्प्रभावी होने के बाद क्या जम्मू-कश्मीर से बाहर रह रहे कश्मीरी पंडितों को मिलने वाली सहायता राशि सरकार बंद कर देगी? यह एक बड़ा सवाल है. इस पर च्रुंगू कहते हैं कि जब तक वापसी नहीं होती है तब तक सरकार को इसे बंद तो नहीं करना चाहिए. यह पैसा उन्हीं परिवारों को मिलता है जिनके पास आय का कोई साधन नहीं है. जो सरकारी नौकरी में है उसके परिवार को सहायता नहीं मिलती. हम तो मोदी सरकार से 25 हजार रुपये प्रतिमाह की सहायता मांग रहे हैं.
मोदी सरकार ने बढ़ाई आर्थिक मदद
फिलहाल सरकारी नौकरी वालों को छोड़कर हर कश्मीरी परिवार को 13 हजार रुपये प्रतिमाह मिलते हैं. जो पहले सिर्फ 6600 रुपये था. जिसे मोदी सरकार ने मई 2015 में बढ़ाकर 10 हजार किया था. सरकार ने महंगाई आदि को देखते हुए जून 2018 इसमें तीन हजार रुपये का और इजाफा कर दिया था. लेकिन अब बदले हालात में क्या होगा? जानकारों का कहना है कि जब तक उन्हें बसाया नहीं जाएगा तब तक इसे वापस नहीं लिया जा सकता.
फिलहाल सरकारी नौकरी वालों को छोड़कर हर कश्मीरी परिवार को 13 हजार रुपये प्रतिमाह मिलते हैं. जो पहले सिर्फ 6600 रुपये था. जिसे मोदी सरकार ने मई 2015 में बढ़ाकर 10 हजार किया था. सरकार ने महंगाई आदि को देखते हुए जून 2018 इसमें तीन हजार रुपये का और इजाफा कर दिया था. लेकिन अब बदले हालात में क्या होगा? जानकारों का कहना है कि जब तक उन्हें बसाया नहीं जाएगा तब तक इसे वापस नहीं लिया जा सकता.
च्रुंगू ने कहा कि आर्टिकल 370 और 35ए निष्प्रभावी करने का काम केवल मोदी सरकार ही कर सकती थी और उसने कर दिखाया. कश्मीरी पंडितों की सहायता रकम चार साल में दो बार बढ़ाई. अब इसी सरकार से उम्मीद है कि कोई रोडमैप तैयार कर कश्मीरी पंडितों की घर वापसी भी करवाएगी.
चार साल पहले घोषित हुआ था पैकेज
मोदी सरकार ने 7 नवंबर 2015 को 1,080 करोड़ रुपये की लागत से कश्मीरी प्रवासियों के लिए राज्य सरकार की 3,000 अतिरिक्त नौकरियां सृजित करने और 920 करोड़ रुपये की लागत से कश्मीर घाटी में 6,000 ट्रांजिट आवासों के निर्माण का अनुमोदन प्रदान किया था.
मोदी सरकार ने 7 नवंबर 2015 को 1,080 करोड़ रुपये की लागत से कश्मीरी प्रवासियों के लिए राज्य सरकार की 3,000 अतिरिक्त नौकरियां सृजित करने और 920 करोड़ रुपये की लागत से कश्मीर घाटी में 6,000 ट्रांजिट आवासों के निर्माण का अनुमोदन प्रदान किया था.
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