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एक साल में 252 महिलाओं ने खुद लिया तलाक, मैहर भी किया माफ, 622 केस अभी पेंडिंग हैं

 


 

भोपाल तीन तलाक का कानून बनने के बाद अब मुस्लिम महिलाएं खुद तलाक (खुला) मांगने लगी हैं। इसके लिए वह मैहर भी माफ करने को तैयार रहती है। ऐसी 252 महिलाएं है, जिन्होंने एक साल (जुलाई-2020 से जून 2021 तक) में स्वेच्छा तलाक लिया है।

इसके लिए सभी ने कारण अलग-अलग बताए लेकिन कमोबेश सभी की जिद एक ही रही कि उन्हें अपने पति के साथ नहीं रहना। छह महिलाएं ऐसी भी है, जो पति से राजीनामा होने पर वापस ससुराल चली गई। एक साल से 622 मामले मसाजिद कमेटी के परामर्श केंद्र में लंबित है। परामर्श केंद्र में तलाक मांगने वालों की काउंसलिंग की जाती हैं।

छह महिलाएं ऐसी भी हैं, जो पति से राजीनामा होने पर वापस ससुराल चली गईं

तीन तलाक कानून बनने के बाद अब एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अपने दाम्पत्य संबंधों को लेकर महिलाएं अधिक जागरुक हुई हैं। वे अब घरेलू हिंसा हो या प्रताड़ना अथवा पारिवारिक उलाहना। इसके खिलाफ वह मुखर दिखाई देती है। ऐसी कई महिलाएं आपको रोज ताजुल मसाजिद के नजदीक स्थित मसाजिद कमेटी के परामर्श केंद्र में मिल जाएगी। अधिकतर यहां तलाक के सिलसिले में पड़ताल करने आती है। प्रक्रिया भी समझती है।

उनका जोर इस बात पर रहता है कि आपसी सहमति से अपने पति से संबंध विच्छेद हो जाए। इसके लिए वे मैहर की रकम माफ करने को तैयार रहती है। साथ ही इस बात का भी शपथ पत्र देती है कि वह भरण पोषण नहीं मागेंगी। पिछले 1 जून से अब तक कुल 622 आवेदन परामर्श केंद्र को खुला मांगने के लिए मिले हैं।

लॉक डाउन के चलते सिर्फ 252 मामलों में काउंसलिंग हुई है। इस दौरान महिलाओं को समझाया भी गया, लेकिन उनका एक ही जवाब रहा कि उन्हें तलाक चाहिए। दरअसल, इस्लाम में खुला महिला का अधिकार है। पति चाहे तो इसके पालन में वह महिला से संबंध विच्छेद कर सकता है। यानी तलाक। सिर्फ इतना ही जिन महिलाओं ने लव मैरिज की है, वह भी खुला मांग रही है। ऐसे भी कुछ मामले की भी यहां काउंसलिंग हुई हैं। नतीजा शून्य रहा।

खुला मांगने की वजह

  • पति बेरोजगार है। बेवजह डांटता है। ताने देता है।
  • पति घरवालों की तुलना में उसे तवज्जो नहीं देता।
  • शंकालु स्वभाव होने के कारण साथ नहीं रहना।
  • ससुराल पक्ष का व्यवहार अच्छा नहीं होना।
  • कमाई होने के बाद भी खर्चे के लिए रुपए न देना।
  • शराब पीने की प्रवृति।
  • शिक्षित होने पर नौकरी नहीं करने देना।

6-8 मामलों की रोज काउंसलिंग

तीन तलाक कानून के बाद महिलाएं खुला मांगने ज्यादा आ रही है। कुछ मामले ऐसे हैं, जिनमें शादी हुए दो या तीन माह हुए हैं। यह सभी शादी खत्म करने यह मैहर माफ करने को भी तैयार रहती है। लॉकडाउन के बाद रोजाना 10 केस आ रहे हैं, लेकिन काउंसलिंग सिर्फ 6-8 मामलों की ही कर पाते हैं। -आफताब अहमद, काउंसलर, परामर्श केंद्र

कई मामलों में सुलह भी हुई

परामर्श केंद्र में खुला मांगने के केस बढ़ने की वजह धैर्य-विश्वास का संकट है। समझाइश के चलते कई अवसर देते हैं। कई मामलों में काउंसलिंग के कारण सुलह हुई है

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