प्राइवेट कोचिंग में धड़ल्ले से चल रहा वसूली अभियान
शिवपुरी जिले के सरकारी स्कूलों में पदस्थ कुछ शिक्षकों द्वारा शिक्षा के मंदिर को कमाई का जरिया बनाने का गंभीर मामला सामने आया है। क्षत्रिय फ्रीडम फाइटर्स एंड ह्यूमन राइट्स एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष नीरज वर्मा ने जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को शिकायती आवेदन सौंपकर सरकारी शिक्षकों की मनमानी गतिविधियों का पर्दाफाश किया है।
मंगलवार को संगठन द्वारा दी गई शिकायत के मुताबिक, एल.डी. शर्मा – पदस्थ: शास. उच्च. माध्य. विद्यालय क्र. 2, शिवपुरी (कोचिंग: ए.पी. कोठी के पीछे, शिवपुरी)
2. प्रदीप झा – पदस्थ: कन्या शिक्षा परिसर (KSP), शिवपुरी (कोचिंग: डॉ. विश्वास के पास, शिवपुरी)
3. कल्पना धाकड़ – पदस्थ: शास. उत्कृष्ट उच्च. माध्य. विद्यालय क्र. 1, शिवपुरी (कोचिंग: लक्ष्मीबाई रोड, शिवपुरी)
4. केशव शर्मा – पदस्थ: शासकीय कन्या उ.मा.वि., शिवपुरी (कोचिंग: हाथी खाना, शिवपुरी)
5. देवेन्द्र धाकड़ – पदस्थ: शासकीय स्कूल, सिरसौद (कोचिंग: इन्डेक्टवेक्ष राजेश्वरी रोड, शिवपुरी)
6. मनीष शर्मा – पदस्थ: शास. उत्कृष्ट उ.मा.वि. क्र. 1, शिवपुरी (कोचिंग: पी.एस. होटल के पीछे, शिवपुरी)
7. कृष्णकांत राठौर – पदस्थ: शास. कन्या उ.मा.वि., शिवपुरी (कोचिंग: स्टार एकेडमी, महिन्द्रा एजेन्सी के सामने, शिवपुरी)
8. विपिन पचौरी – पदस्थ: शास. उ.मा.वि. क्र. 2, शिवपुरी (कोचिंग: राजेश्वरी रोड, शिवपुरी)
9. गोविन्द धाकड़ – पदस्थ: शास. उ.मा.वि. क्र. 1, शिवपुरी (कोचिंग: हाथी खाना, शिवपुरी)
10. दीप ओझा – पदस्थ: शास. उत्कृष्ट उ.मा.वि. क्र. 1, शिवपुरी (कोचिंग: झांसी तिराहा, शिवपुरी)
11. ददीवाल सर – पदस्थ: शास. उत्कृष्ट उ.मा.वि. क्र. 1, शिवपुरी (कोचिंग: साइंस कॉलेज के पास, शिवपुरी) की शिक्षक
पर बिना अनुमति के अवैध रूप से प्राइवेट कोचिंग संचालित करने के गंभीर आरोप लगे हैं।
फीस वसूली और धमकियों का खेल
शिकायत में बताया गया है कि ये शिक्षक अपने कोचिंग संस्थानों में पढ़ने वाले प्रत्येक विद्यार्थी से सालाना 6000 से 7000 रुपएतक फीस वसूल रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि जो छात्र गरीब परिवारों से ताल्लुक रखते हैं और इनकी कोचिंग ज्वाइन करने में असमर्थ हैं, उन्हें प्रैक्टिकल परीक्षाओं में कम नंबर देने या फेल करने की खुली धमकियां दी जा रही हैं।
आरोप है कि ये शिक्षक सरकारी स्कूलों की कक्षाओं में जानबूझकर पूरा पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाते हैं, ताकि छात्र उनकी प्राइवेट कोचिंग ज्वाइन करने के लिए विवश हो जाएं। यह खेल सर्विस कंडक्ट रूल्स (सरकारी सेवा नियमों) का खुला उल्लंघन है, जिससे मासूम विद्यार्थियों पर गहरा मानसिक और आर्थिक दबाव बन रहा है।
ह्यूमन राइट्स एसोसिएशन ने इस मामले के वीडियो और पुख्ता सबूत होने का दावा किया है और जिला शिक्षा अधिकारी से मांग की है कि तत्काल निष्पक्ष जांच कराकर इन शिक्षकों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो सके।
अतिरिक्त बिंदु एवं विश्लेषण:
- पत्रकारों की शिकायतों पर भी नहीं हुई कार्रवाई: इस गंभीर मुद्दे को लेकर लगातार स्थानीय पत्रकारों द्वारा भी प्रशासन और शिक्षा विभाग को शिकायतें की गईं और समाचार प्रकाशित किए गए, लेकिन इसके बावजूद अब तक दोषी शिक्षकों पर कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे उनके हौसले बुलंद हैं।
- 6 घंटे स्कूल बनाम 1 घंटा कोचिंग: यहाँ सोचने और समझने वाली सबसे बड़ी बात यह है कि वही शिक्षक सरकारी स्कूल में 6 घंटे रहने के बावजूद बच्चों को कुछ नहीं पढ़ा पाते, लेकिन अपनी प्राइवेट कोचिंग में वही शिक्षक मात्र 1 घंटे में बहुत कुछ पढ़ा देते हैं।
- व्यवस्था पर सवाल: इससे यह साफ जाहिर होता है कि आज की व्यवस्था में "पैसे से ही सब कुछ होता है"। सरकारी स्कूल का वेतन लेने के बाद भी सिर्फ निजी स्वार्थ और कोचिंग फीस के लालच में बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। शासन को इस पर तुरंत और कड़ा ध्यान देने की आवश्यकता है।

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