शिवपुरी में ₹2500 करोड़ का यह प्रोजेक्ट निश्चित रूप से भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता के लिए एक बड़ा कदम है, लेकिन स्थानीय स्तर पर इसकी सफलता तभी मानी जाएगी जब यह शिवपुरी के गरीब मजदूरों के चूल्हे जला सके और दर-दर भटक रहे बेरोजगार युवाओं को सम्मानजनक रोजगार दे सके। केवल कागजी आंकड़ों और चमचमाती इमारतों से क्षेत्र का वास्तविक सामाजिक-आर्थिक विकास संभव नहीं है।
शिवपुरी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शिवपुरी के पाली में अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के अत्याधुनिक मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का भूमिपूजन कर इसे ग्वालियर-चंबल संभाग के लिए एक ऐतिहासिक बदलाव बताया है। सरकार का दावा है कि इस मेगा प्रोजेक्ट से क्षेत्र में निवेश का नया युग शुरू होगा। हालांकि, विकास के इन बड़े दावों के समानांतर क्षेत्र में **मजदूरों के पलायन और गहराती बेरोजगारी की एक ऐसी जमीनी हकीकत भी है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
बड़े वादे बनाम जमीनी हकीकत - क्या स्थानीय मजदूरों को मिलेगा हक?
सरकार का अनुमान है कि इस मिसाइल इकोसिस्टम प्लांट से लगभग 4 से 5 हजार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या ये नौकरियां स्थानीय मजदूरों और युवाओं को मिल पाएंगी?
कौशल (Skill) का अभाव: यह एक अत्याधुनिक डिफेंस और मिसाइल प्लांट है, जिसके लिए बेहद उच्च तकनीकी और कुशल (Skilled) जनशक्ति की आवश्यकता होगी। शिवपुरी और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकांश मजदूर अप्रशिक्षित या अर्ध-कुशल हैं। ऐसे में डर यह है कि तकनीकी पद बाहरी राज्यों के लोगों के खाते में चले जाएंगे और स्थानीय मजदूरों के हाथ केवल निर्माण कार्य या सुरक्षा जैसे निचले स्तर के काम ही आएंगे।
मजदूरों का निरंतर पलायन: शिवपुरी जिला लंबे समय से कम मजदूरी और स्थानीय स्तर पर काम न मिलने के कारण मजदूरों के बड़े पैमाने पर पलायन (Migration) से जूझ रहा है। मनरेगा जैसी योजनाएं भी ग्रामीण आबादी को पूरे साल रोजगार देने में नाकाम रही हैं, जिसके कारण यहां का मजदूर वर्ग हर साल गुजरात, दिल्ली और राजस्थान की ओर रुख करने को मजबूर होता है।
2. बेरोजगारी पर अध्ययन: युवाओं की उम्मीदें और निराशा
ग्वालियर-चंबल संभाग में सरकारी नौकरियों की कमी और निजी उद्योगों के अभाव के कारण शिक्षित बेरोजगारी का ग्राफ लगातार बढ़ा है।
घोषणाएं बनाम क्रियान्वयन:स्थानीय युवाओं और आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि पूर्व में भी ऐसी कई औद्योगिक घोषणाएं कागजों पर या शिलान्यास तक ही सीमित रह गईं, जिन्हें धरातल पर उतरने में सालों लग गए। यदि इस प्लांट के निर्माण और संचालन में देरी होती है, तो रोजगार की तलाश में भटक रहे युवाओं की निराशा और बढ़ सकती है।
लघु उद्योगों की अनदेखी: यद्यपि सरकार का दावा है कि इस प्लांट से स्थानीय लघु रक्षा उत्पादन इकाइयों (MSMEs) को बढ़ावा मिलेगा, लेकिन हकीकत यह है कि क्षेत्र के छोटे और पारंपरिक उद्योग पहले से ही कर्ज, बिजली की ऊंची दरों और बुनियादी ढांचे की कमी के कारण दम तोड़ रहे हैं। जब तक इन छोटे उद्योगों को सीधी सरकारी मदद नहीं मिलती, तब तक केवल एक बड़े प्लांट के भरोसे व्यापक बेरोजगारी दूर करना नामुमकिन है।
3. शिवपुरी के लिए घोषित अन्य विकास कार्य
इस आलोचनात्मक पक्ष के साथ ही, प्रशासन द्वारा जिले के बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए ₹211 करोड़ के 38 विकास कार्यों की भी घोषणा की गई है
सड़क और यातायात:शिवपुरी शहर में ट्रैफिक के दबाव को कम करने के लिए ₹120 करोड़ की लागत से 14 किमी लंबा फोरलेन (सर्चुलर रोड) बनाने की घोषणा की गई है।
प्रशासनिक व शैक्षणिक बदलाव: सुभाषपुरा को नई तहसील बनाने, खोड़ में नया शासकीय कॉलेज खोलने और कोलारस में नया सांदीपनि विद्यालय बनाने का प्रस्ताव है।
स्वास्थ्य अवसंरचना : जिला अस्पताल शिवपुरी में बच्चों के इलाज के लिए 200 बिस्तरों का नया अस्पताल और पिछोर के वीरा में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) खोला जाएगा।
सांस्कृतिक पर्यटन: शहर में 108 फीट की शिव प्रतिमा के साथ एक टूरिज्म सेंटर विकसित करने की बात कही गई है।



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