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Shivpuri News : शिवपुरी में सिस्टम फेल? इंसाफ के लिए पेट्रोल की बोतल लेकर कंट्रोल रूम पहुंची महिला, मचा हड़कंप!

शिवपुरी में हाई-वोल्टेज ड्रामा: पेट्रोल की बोतल लेकर पुलिस कंट्रोल रूम पहुंची महिला 

शिवपुरी जब थानों के चक्कर काटकर थक गए, जब कानून के रखवालों ने आखें मूंद लीं, तो आखिरकार एक बेबस महिला को खुद को आग लगाने के लिए मजबूर होना पड़ा! शिवपुरी के पुलिस कंट्रोल रूम में मंगलवार को उस वक्त रोंगटे खड़े कर देने वाला नजारा दिखा, जब सईसपुरा की चंदा बेगम हाथ में पेट्रोल की बोतल लिए अपने पति कलीम खान के साथ आत्मदाह करने पहुंच गई।

गनीमत रही कि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने मुस्तैदी दिखाई और भारी कशमकश के बाद महिला के हाथ से पेट्रोल की बोतल छीन ली, वरना एक बड़ी अनहोनी तय थी।

दहेज लोभियों की हैवानियत: शौचालय में भी जड़ दिया ताला!

पीड़िता का आरोप है कि शादी के बाद से ही उसकी सास, ननद और देवर कम दहेज का ताना देकर उसे जानवर की तरह प्रताड़ित कर रहे हैं।

 सब कुछ हड़पा आरोपियों ने महिला के सारे गहने और नकदी पर डाका डाल दिया है।

 शौचालय पर ताला - जुल्म की इंतेहा देखिए कि पीड़ित दंपति को प्रताड़ित करने के लिए घर के कॉमन शौचालय पर भी ताला ठोक दिया गया है।

 खून-पसीने की कमाई पर नजर - पति कलीम खान का रो-रोकर बुरा हाल है, उसका कहना है कि जिस मकान को उसने दिन-रात एक करके अपनी गाढ़ी कमाई से बनाया, आज उसकी खुद की मां (सास) उसे हड़पकर उन्हें बेघर करने की साजिश रच रही है।

थानों के चक्कर काटे, मिली सिर्फ 'तारीख' और 'धमकी'!

दंपति का सबसे बड़ा आरोप  फिजिकल थाना और  महिला थाना - की कार्यप्रणाली पर है। उनका कहना है कि वे गुहार लगाते-लगाते थक गए, लेकिन पुलिस ने उनकी एक न सुनी। उल्टा 13 अप्रैल को उनके साथ बर्बरता से मारपीट की गई और अब उन्हें ही झूठे मुकदमों में फंसाने की लगातार धमकियां दी जा रही हैं। जब रक्षक ही भक्षक की भाषा बोलने लगे, तो पीड़िता पेट्रोल की बोतल उठाने पर मजबूर हो गई।


पुलिस का गोलमोल जवाब


कंट्रोल रूम में हुए इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद पुलिस के आला अधिकारी बैकफुट पर हैं।  एडिशनल एसपी संजीव मुले ने कैमरे के सामने आकर मामले को थोड़ा दबाने की कोशिश करते हुए कहा कि महिला के हाथ में पेट्रोल नहीं था, लेकिन वह आत्मघाती कदम उठाने की बात कह रही थी। हालांकि, पुलिस ने अब मामले की 'निष्पक्ष जांच' का पुराना और घिसा-पिटा आश्वासन देकर पल्ला झाड़ लिया है।


क्या पुलिस किसी बड़ी वारदात या मौत का इंतजार कर रही थी? 

थानों में सुनवाई क्यों नहीं हुई, इसका जवाब देने से अब हर कोई बच रहा है।

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