शिवपुरी। चंद रुपयों के लालच में जनता की गाढ़ी कमाई को दांव पर लगाने वाले और सरकारी नियमों को अपने पैर की जूती समझने वाले अवैध कॉलोनाइजरों पर आखिरकार प्रशासन का बड़ा डंडा चल गया है। शिवपुरी के सिंहनिवास और नोहरीकला में बिना किसी वैध अनुमति के, कागजों में 'स्वर्ग' दिखाकर अवैध कॉलोनियां काटने वाले 4 बड़े कॉलोनाइजरों के खिलाफ कोतवाली पुलिस ने एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है। इस कार्रवाई के बाद से शहर के तथाकथित प्रॉपर्टी डीलरों और भू-माफियाओं की रातों की नींद उड़ी हुई है।
खेल खत्म! इन 4 चेहरों पर दर्ज हुआ मुकदमा
नियमों को ताक पर रखकर, बिना रेरा (RERA) और बिना टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की अनुमति के सीधे सीधे जनता की जेब पर डाका डालने वाले ये वो 4 नाम हैं जिन पर कोतवाली पुलिस ने शिकंजा कसा है
अभिजीत सिंह भदौरिया (पिता धर्मसिंह भदौरिया): आरोप है कि इन्होंने ग्राम सिंहनिवास में बिना किसी वैध सरकारी दस्तावेज के ही कॉलोनी तान दी और धड़ल्ले से प्लॉट बेच डाले।
जितेन्द्र शर्मा (पिता मोहनलाल शर्मा): तुलसीनगर (झांसी तिराहा) के रहने वाले इस रसूखदार पर भी ग्राम सिंहनिवास की कीमती जमीन पर अवैध रूप से कॉलोनाइजर बनकर प्लाटिंग करने का गंभीर मामला दर्ज हुआ है।
कावेन्द्र सिंह (पिता कप्तान सिंह): मुरैना के सुभाष नगर से आकर शिवपुरी के ग्राम सिंहनिवास में अवैध साम्राज्य खड़ा करने की कोशिश कर रहे कावेन्द्र सिंह को भी पुलिस ने आरोपी बनाया है।
राजीव गुप्ता (राज रियल एस्टेट डेवलपर्स): हनुमान कॉलोनी के रहने वाले राजीव गुप्ता, जो खुद को बड़ी रियल एस्टेट कंपनी का प्रोपराइटर बताते हैं, उनकी 'राज रीयल एस्टेट' की पोल भी ग्राम नोहरीकला में खुल गई। नियमों की धज्जियां उड़ाकर कॉलोनी विकसित करने के आरोप में इन पर भी गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है।
भोली-भाली जनता को फंसाने का था पूरा प्लान
ये कॉलोनाइजर बिना सड़क, बिना नाली, बिना बिजली और बिना डायवर्शन के ही कौड़ियों के दाम पर जमीन खरीदकर उसे करोड़ों में आम जनता को बेच देते हैं। बाद में जब लोग वहां घर बनाते हैं, तो बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसते हैं और सरकारी कार्यबाही की तलवार उन पर लटकती है।
प्रशासन की दो टूक: सुधर जाओ वरना जेल जाओगे!
प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है कि शिवपुरी में अवैध प्लाटिंग का यह धंधा अब नहीं चलने दिया जाएगा। जो भी बिना अनुमति के कॉलोनी काटेगा, उसका अगला ठिकाना जेल होगा। वहीं आम जनता से भी अपील की गई है कि ऐसे धोखेबाजों के चमचमाते विज्ञापनों फफूद लगाते दलाल के झांसों में आकर अपनी मेहनत की कमाई न फंसाएं। पहले सरकारी दफ्तर जाकर कॉलोनी की वैधता की जांच करें, फिर ही कोई कदम उठाएं।

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