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मासूम की हत्या और पुलिस का चकमा: केवल आरोपी की तलाश काफी नहीं, जवाबदेही तय होना जरूरी

पुलिस अभिरक्षा से फरारी और सुरक्षा व्यवस्था पर उठते सवाल

shivpuri / पोहरी क्षेत्र के श्यामपुरा गांव में 6 साल की मासूम बेटी की हत्या के आरोपी पिता रामबरन आदिवासी का पुलिस वाहन से कूदकर फरार हो जाना केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली और सुरक्षा तंत्र पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। जिस जघन्य अपराध के आरोपी को न्यायालय में पेश करने के लिए ले जाया जा रहा था, वह बिलौआ तिराहा के पास चलती गाड़ी से चकमा देकर भाग निकला।

इस घटना के बाद पुलिस ने आरोपी पर 10 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया है और उसकी तलाश में कई टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। सीमावर्ती इलाकों में भी सर्चिंग जारी है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि कस्टडी से फरारी की नौबत आखिर आई कैसे?

सुरक्षा चूक और जवाबदेही की दरकार

  • लापरवाही की निष्पक्ष जांच: आरोपी को भारी मशक्कत के बाद गिरफ्तार किया गया था, फिर चलती गाड़ी से उसकी फरारी सुरक्षा में बेहद ढिलाई को दर्शाती है। इस चूक के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
  • सख्त कार्रवाई की जरूरत: केवल फरार आरोपी को पकड़ना ही काफी नहीं है, बल्कि कस्टडी में सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय कर उनके खिलाफ भी कठोर अनुशासनात्मक कदम उठाने चाहिए।
  • व्यवस्था में सुधार: पुलिस कस्टडी में अपराधियों की सुरक्षा और निगरानी प्रक्रिया की समीक्षा जरूरी है ताकि भविष्य में कोई आरोपी इस तरह कानून को चकमा न दे सके।

एक मासूम की हत्या जैसे संवेदनशील और गंभीर मामले का आरोपी अगर पुलिस हिरासत से ही भाग जाए, तो इससे जनता का भरोसा डगमगाता है। अब देखना यह होगा कि पुलिस फरार आरोपी रामबरन को कितनी जल्द सलाखों के पीछे भेजती है और इस सुरक्षा चूक के जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई करती है।

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