टिकिट मांगने वालों की फौज से भाजपा डेंजर जोन में।।।।
*बही कांग्रेस में गिने चुने चेहरे इस रेस में शामिल।
*उपचुनाव में हार के वाद भी भाजपा ने कोलारस विधानसभा में नहीं किया होमवर्क।
*उपचुनाव के तुरंत बाद करना था संगठन में बदलाव।
*पोहरी विधायक प्रह्लाद भारती के नाम से सभी भाजपा आशावादी सन्निपात में।
#दिशा बदले तो दशा बदले##
/विवेक व्यास-पत्रकार///
@कोलारस--आगमी विधानसभा का कोलारस चुनाव भाजपा के लिए सिरदर्द पैदा करने वाला हो सकता है।
उपचुनाव में भाजपा की ओर से टिकिट मांगने बालों की एक बडी फौज ने चुनावी परिणाम पर विपरीत प्रभाव डाला जिसकी परिणिती के रूप में देवेंद्र जैन को हार का सामना करना पड़ा।
पूरी सत्ता और संगठन की ताकत के साथ धनवल और 15 साल का भाऊबल भी काम न आ सका और भाजपा की खासी किरकिरी हुई।
जनता ने भाजपा का भरपूर साथ दिया , आँख तो घर के बड़ेरे से फूटी।शायद भाजपा इसको लेकर जानते हुए भी अनजान बनी रही।
लेकिन विल्ली के आने से कबूतर यदि आंख बंद कर ले तो ख़तरा टल नही सकता।
भाजपा ने भी बिल्ली की तरह आंख बंद कर ली कब आमचुनाव के रूप में फिर खतरा सिर पर है।
बिपक्ष के रूप में कांग्रेस के पास कोई ताकतवर मुद्दे भाजपा के विरोध में नही थे क्योंकि भाजपा की क्षत्र छाया में कांग्रेस ही मलाई खा रही है ।
न ही कॉग्रेस ने ऐसा कोई विरोध उपचुनाव में दर्ज कराया केवल एक बैनर तले सांसद ज्योतिबाबू के नेतृत्व में चुनाव लड़ना ही लाभदायक सिद्ध हुआ।
भाजपा की ओर से टिकिट मांगने वालों में सुरेंद्र शर्मा, शुसील रघुवंशी, रामस्वरूप रिझारी,कल्याण यादव,धनपाल यादव,प्रह्लाद भारती, गोलू व्यास,मुकेश यादव,विपिन खेमरिया, आलोक विंदल, गोवर्धन सिंह यादव,सहित कई नेताओं ने दावेदारी की थी वही कांग्रेस में हरवीर रघुवंशी, वैजनाथ यादव,रविन्द्र शिवहरे, भूपेंद्र यादव ही गिने चुने चेहरे थे।
उक्त कांग्रेस के चेहरे भी अपने सांसद का आदेश पाकर चुप हो गए।
भाजपा में टिकिट माँगने वालों की बड़ी फौज ने उपचुनाव में ऐसा रायता फैलाया की अभी भी स्तिथि डेंजर जोन में है।
उपचुनाव के बाद भाजपा कोलारस विधानसभा में सही होमवर्क नही कर सकी यदि वो इस विधानसभा को आगमी आमचुनाव में जीतने की मंशा में होती तो कुछ मूलभूत बदलाव अवश्य करती ।
इस क्रम में सबसे पहले संगठन के चेहरों में वदलाव करती वही क्षेत्रीय प्रत्याशी को इस चुनाव में घोषित करना जरूरी था ताकि बाहरी प्रत्याशी चुनाव के लिए टिकिट की मांग ही न कर सके।
कोलारस के प्रशासन की पूर्व में भाजपा मंत्रियों द्वारा मॉनिटरिंग की जाना जरूरी था।
भाजपा में जिसने भी पार्टी के विरोध में काम किया उसके खिलाफ कार्यवाही की जाना थी
कभी भी कांग्रेस के पास विपक्ष कर रूप में भाजपा के विरुद्ध कोई मुद्दा नही है होगा भी कहाँ से सभी निकायों पर कांग्रेस काबिज है और भाजपा उनके निकायों के भ्रष्टाचार उजागार करने में पूरी तरह असफल रही है।
चोर चोर मौसेरे भाई की तर्ज पर सबकुछ चल रहा है । इस कक्षेत्र में राजनीति इतनी प्रभावी नही है इस कारण अधिकारी अमले का भ्रष्टाचार भी चुनावी समर को दिशा देने में अहम भूमिका अदा करता है।हुमने प्रश्सिनिक अमले के भ्रष्टाचार को चुनाव से पहले हारने के कारण के रूप में दर्शया था । किंतु इस समय ऐसा मामला नही है क्योंकि कोलारस का पूरा प्रश्सिनिक अमला नया है कुछ एक माचो नुमा बाबू अभी भी मुसीबत का काम करेंगे।
भाजपा दावेदारों के सामने पहले ही बहुत फौज थी किन्तु पोहरी विधायक प्रह्लाद भारती का नाम आने से और अधिक मुसीबत सत्ता और संगठन की बड़ गई हों।
इस प्रकार भाजपा के उम्मीदवारों की बड़ी फौज इस आमचुनाव में भी पार्टी को कष्टदायक हो सकती है। शीघ्र ही भाजपा को कोलारस विधानसभा में ख़ासा होमवर्क करने की आवश्यकता है तभी सिंधिया के गढ़ में भाजपा सम्मानजनक युद्ध लड़ सकती है।
जय भारत।
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