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MP TOP News : MP: 102 दिनों से लापता पूर्व TI गजेंद्र सिंह धाकड़, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

 


 रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले से एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर मामला सामने आया है। मनगवां थाने के पूर्व थाना प्रभारी (TI) गजेंद्र सिंह धाकड़ पिछले 102 दिनों से रहस्यमयी परिस्थितियों में लापता हैं। एक तरफ जहां उनके परिजन किसी अनहोनी की आशंका से परेशान हैं, वहीं दूसरी तरफ इस मामले ने पुलिस महकमे और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। आम जनता में अब यह चर्चा तेज है कि *“जो प्रशासन अपने ही अधिकारी को नहीं ढूंढ पा रहा है, वह आम जनता की समस्याओं का समाधान कैसे करेगा?”* यह सिर्फ लापरवाही है या इसके पीछे कोई गहरी साजिश है?

निलंबन के बाद से ही सुराग ढूंढने में नाकाम रही पुलिस

पूरा मामला इस प्रकार है - 


 फरवरी के अंत में कार्रवाई: विभागीय कार्रवाई के तहत पूर्व TI गजेंद्र सिंह धाकड़ को निलंबित (Suspend) किया गया था।

 रोजनामचा में बीमारी की एंट्री: - निलंबन का आदेश मिलते ही उन्होंने थाने के रोजनामचा (Daily Diary) में अस्वस्थ होने की एंट्री दर्ज कराई और वहां से रवाना हो गए।

 नियमों की अनदेखी: नियमों के मुताबिक निलंबन के बाद उन्हें तत्काल पुलिस लाइन रीवा में अपनी आमद (Report) दर्ज करानी थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।

नोटिसों का नहीं मिला जवाब, पैतृक आवास पर भी पसरा सन्नाटा

विभाग द्वारा लापता अधिकारी को ढूंढने और स्पष्टीकरण मांगने के लिए कई नोटिस जारी किए गए, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब या संपर्क नहीं किया गया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस की एक टीम उनके पैतृक निवास **ग्वालियर** भी भेजी गई। हालांकि, वहां भी उनके संबंध में कोई ठोस जानकारी हाथ नहीं लगी। वर्तमान में उनका पूरा परिवार भी उनकी तलाश में भटक रहा है।

अब तकनीकी जांच के भरोसे पुलिस

लंबा समय बीत जाने के बाद अब रीवा पुलिस ने इस मामले में तकनीकी साक्ष्यों का सहारा लेना शुरू किया है। पुलिस की विशेष टीमें निम्नलिखित बिंदुओं पर जांच केंद्रित कर रही हैं:

 कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) आखिरी बार किन लोगों से और क्या बातचीत हुई।

 लास्ट मोबाइल लोकेशन:- फोन बंद होने से ठीक पहले उनकी भौगोलिक स्थिति कहाँ थी।

 तकनीकी साक्ष्य: - बैंक ट्रांजैक्शन और अन्य डिजिटल फुटप्रिंट्स को खंगाला जा रहा है।

बड़ा सवाल: - एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी का इस तरह अचानक 100 से अधिक दिनों तक लापता रहना कई गंभीर अंदेशों को जन्म देता है। क्या यह व्यवस्था की ढिलाई है या फिर परदे के पीछे की कोई बड़ी इनसाइड स्टोरी? देखना होगा कि तकनीकी जांच के बाद पुलिस कब तक अपने ही लापता साथी का सुराग लगा पाती है।

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