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जनजाति समाज पर शोध जनजातियों के नजरिए से किए जाने की आवश्यकता है : श्री हर्ष चौहान

 भोज मुक्त विश्वविद्यालय में जनजातीय शोध पीठ का शुभारंभ



मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग नई दिल्ली के सहयोग से जनजातीय शोध पीठ का शुभारंभ किया गयाl इस संबंध में आयोजित एक समारोह में बोलते हुए राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष श्री हर्ष चौहान ने कहा कि जनजातीय गौरव दिवस घोषित होने से सभी देशवासियों का ध्यान जनजातियों की ओर गया है। उन्होंने कहा कि जनजातियों के बारे में ईमानदारी से किये गये अध्ययन का स्वागत सबसे पहले जनजातियाँ करेंगीl जनजातियों की सबसे बड़ी पीड़ा यह है कि वे कहते हैं कि हमें कोई समझता ही नहीं लेकिन हमारे बारे में बातें बहुत की जाती हैं। उन्होंने कहा कि जनजातियों के बारे में उनके नाम पर काम कम और पाखंड ज्यादा किया जाता है। भोज मुक्त विश्वविद्यालय की शोध पीठ के संदर्भ में उन्होंने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि मुझे आशा है कि यह शोध पीठ जनजातियों के संदर्भ में एक ईमानदार शोध का प्रयास करेगी जिसमें जनजातियों की केवल सांस्कृतिक पहचान की ही चर्चा नहीं होगी बल्कि उनके सामाजिक ढांचे, सामाजिक व्यवस्था, उनकी अर्थव्यवस्था, जनजातियों से संबंधित कानून, तकनीकी और जनजाति के अधिकारों के बारे में विस्तृत और गहन शोध किया जाएगा l हर्ष चौहान जी ने कहा कि भारत में प्रारम्भ से ही राजनीतिक वर्ग जनजातियों के प्रति अपने लगाव को प्रदर्शित करता रहा है और इसके लिए अनेक योजनाएं बनाईं गई किंतु समस्या यह है कि योजनाओं को लागू करने वाले संस्थानों को जनजातियों के संदर्भ में बहुत ही कम जानकारी है और जो भी जानकारी है वह भी शहरी नजरिए वाली हैl उन्होंने कहा कि जनजाति समाज के संदर्भ में हमारे संविधान निर्माताओं के द्वारा पहले ही बहुत अच्छी व्यवस्था की गयी है ताकि वे लोग अपनी सांस्कृतिक परंपराओं आदि का पालन करते हुए विकास कर सकें। उन्होंने आगे कहा कि इस शोध पीठ में जनजाति अर्थव्यवस्था, विकास, उनके अधिकार और कानूनों के संदर्भ तथा जंगलों के संदर्भ में विशेष अध्ययन की आवश्यकता हैl

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति डॉक्टर जयंत सोनवलकर ने कहा कि जनजातीय शोध को जमीन पर जाकर गांव-गांव में घूमकर करना होगा l इस समय ऐसे प्लेटफार्म की जरूरत है जहां अलग-अलग हो रहे तमाम शोधों को एक जगह पर रखकर उसका विस्तृत अध्ययन किया जा सके जिससे सरकार को भी अपनी नीतियां बनाने में मदद मिल सकेl इस अवसर पर डॉ सोनवलकर ने कहा कि विश्वविद्यालय इस शोध पीठ के लिए 5 करोड़ रुपए का प्रावधान करेगा तथा इसके लिए एक प्राध्यापक, दो सह प्राध्यापक और 3 सहायक प्राध्यापक और इनके साथ अनेक शोधार्थियों का प्रावधान किया गया, जिससे जनजातीय शोध का कार्य सुचारू रूप से जल्द ही शुरू किया जा सकेl

कार्यक्रम में उपस्थित मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय नियामक आयोग के अध्यक्ष डॉक्टर भरत शरण सिंह ने कहा कि भोज विश्वविद्यालय की इस शोध पीठ का लाभ सम्पूर्ण मध्य प्रदेश को होगा l पर्यावरण को संरक्षित करने में जनजातीय समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा हैl उन्होंने कहा कि जनजातीय संस्कृति आपस में एक दूसरे से जोड़ने की संस्कृति हैl ऐसा इतिहास में कोई भी उदाहरण नहीं मिलता जहां जनजातीय लोगों ने किसी प्रकार का देशद्रोह किया हो या विदेशी आक्रमणकारियों से मिल गए हों। डॉक्टर भरत शरण सिंह ने कहा कि उन्हें आशा है कि यह शोध पीठ जनजातीय समुदाय के कुछ अनसुलझे एवं अनछुए पहलुओं को समाज के सामने लाएगीl

कार्यक्रम में उपस्थित मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति और प्रवेश एवं फीस नियामक कमेटी के अध्यक्ष डॉक्टर रविंद्र कान्हेरे ने कहा कि जनजातियों की भाषा, बोली, कहावतों की रचनाओं पर बहुत कम काम हुआ है, इस पर और अधिक शोध की आवश्यकता है l उन्होंने राष्ट्रीय जनजाति आयोग के अध्यक्ष हर्ष चौहान जी से निवेदन किया कि मुक्त विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले जनजातीय बच्चों की फीस माफ करने के लिए उचित कदम उठाया जाएl

कार्यक्रम की प्रस्तावना देते हुए विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एलपी झारिया ने कहा कि मध्य प्रदेश में जनजातियों की जनसंख्या लगभग कुल जनसंख्या का 20% है l जनजाति समाज की अपनी एक अलग सभ्यता एवं संस्कृति होती हैl यह समुदाय देश में अपना एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है लेकिन यह अध्ययन का विषय है कि इस समाज की मध्यप्रदेश में राजनीतिक सहभागिता कितनी हैl इस समाज के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक पिछड़ेपन के कारणों के संदर्भ में शोध करने की नितांत आवश्यकता हैl

इस अवसर पर मध्यप्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉक्टर एलएस सोलंकी ने कहा कि मध्यप्रदेश के किसी भी विश्वविद्यालय में जनजातीय शोध पीठ की स्थापना नहीं हुई हैl मध्यप्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय को यह शोध पीठ स्थापित करने का पहला मौका मिल रहा है। उन्होंने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग और मध्यप्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय भोपाल के सहयोग से स्थापित इस शोध पीठ के शीघ्र क्रियान्वयन हेतु भरपूर प्रयास किए जाने का आश्वासन दियाl

इस अवसर पर भोज मुक्त विश्वविद्यालय और अनुसूचित जनजाति आयोग नई दिल्ली के मध्य एमओयू का आदान-प्रदान किया गया। कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव डॉक्टर एल एस सोलंकी द्वारा किया गयाl कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर रतन सूर्यवंशी द्वारा किया गयाl

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