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नवाचार के क्षितिज प्रसारण की आवश्यकता

संकर बाजरानेपियर घास: एक ही खेत में वर्ष भर हरा चारा उत्पादन मॉडल करें तैयार




शिवपुरी,   
जिले में आत्मा-जिला प्रशासन-कृषि विज्ञान केन्द्र-पशुपालन विभाग की पहल से नवाचार घटक में संकर बाजरा नेपियर घास के साथ मौसमी हरे चारे की वर्ष भर उपलब्धता के मॉडल को कृषि विज्ञान केन्द्र पर तैयार कराया गया एवं यहीं से कई कृषक जिले में ही नहीं अन्य जिलों में भी रोपण सामग्री ले जाकर स्थापित कर रहे हैं।
संकर बाजरानेपियर घास को स्थापित करने के लिए आगामी वर्षा (जुलाई-अगस्त) के मौसम में रोपण करें इससे पूर्व जिसे खेत में लगाना चाहते हैं वहां खेत की तैयारी अभी से करें। इसे खेत की मेढ़ों पर भी लगाया जा सकता है।

कैसे लगाएं
सामान्यतः चारा फसलों को स्थान कम दिया जाता है। लेकिन इस मॉडल में भूमि के कुशल उपयोग करते हुए 3-3 मीटर की दूरी पर कतारों में संकर बाजरा नेपियर घास की रूट स्लिप्स को 45 डिग्री एंगल पर एक तिहाई भाग जमीन के अंदर दबाते हुए 0.5 से 1 मीटर पौधों में अंतर रखते हुए एकल या दो लाइनों में रोपण करना चाहिए।

तकनीक के लाभ
कतारों में तीन मीटर अंतर से लगाए जाने पर अंतर्वर्ती स्थानों में आसानी से यांत्रिक तरीके से खेती की तैयारी के लिए ट्रैक्टर चलाया जा सकता है तथा कतारों के बीच के स्थानों में मौसमी हरे चारे खरीफ में लोबिया/ग्वार तथा रबी में बरसीम/लूसर्न/जई लगाया जाता हैै। इससे कार्बाेहाइड्रेट एवं प्रोटीन से परिपूर्ण हरे चारों का संयोजनयुक्त उत्पादन पशुधन के लिए उत्पादन प्राप्त होता रहता है जो पशुधन के दूध उत्पादन बढ़ाने में लाभकारी है। इससे दाने की निर्भरता भी कम होने से डेयरी खर्च के व्यय में कमी भी लाई जा सकती है।

कितना उत्पादन
एक ही खेत में वर्ष भर हरा चारा उत्पादन मॉडल से 200 से 250 टन/हे./वर्ष हरा चारा प्राप्त हो जाता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस तकनीक से वर्ष भर पशुधन के लिए हरे चारे की प्राप्ति होती रहती है। जिससे स्टॉल फीडिंग में बहुत मदद होती है।

सराहा एवं दिया मार्गदर्शन
डॉ.अमरेश चन्द्रा, निदेशक, डॉ.ए.के.रॉय परियोजना प्रभारी पी.सी.एफ.सी. एवं डॉ. विजय यादव विभागाध्यक्ष, बीज तकनीकी संभाग एवं वर्तमान में परियोजना प्रभारी पी.सी.एफ.सी., भा.कृ.अनु.प.-भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान झांसी के दल ने केन्द्र पर भ्रमण कर संस्थान की तकनीक के प्रसारित करने पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए और भी अधिक कुशलता के लिए केन्द्र के वैज्ञानिकों को मार्गदर्शन भी दिया जिससे चारा तकनीकियों का अधिक से अधिक प्रसार कृषकों/पशुपालकों तक हो सके।

प्राप्ति स्थान
गुणवत्तायुक्त रूट स्लिप कृषि विज्ञान केन्द्र, शिवपुरी या आईजीएफआरआई झांसी से प्राप्त कर सकते हैं। संकर बाजरा नेपियर घास के साथ मौसमी हरे चारे लगाकर पशुपालक बंधु डेयरी व्यवसाय को और अधिक लाभकारी बना सकते हैं तथा व्यय को भी कम करते हुए पौष्टिक हरा चारा वर्ष भर एक ही खेत से निरंतर मिलता भी रहता है।

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