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पोते के निधन का सदमा बर्दाश्त न कर सकी दादी, कुछ घंटों बाद ही तोड़ा दम; एक साथ उठीं दो अर्थियां

शिवपुरी (बदरवास): कहते हैं रिश्तों का बंधन सांसों की डोर से भी गहरा होता है, और जब यह रिश्ता दादी और पोते का हो तो एक का बिछड़ना दूसरे के जीने की वजह ही छीन लेता है। बदरवास थाना क्षेत्र के धामनटूक गांव में शनिवार को एक ऐसी ही दिल दहला देने वाली और भावुक कर देने वाली घटना सामने आई, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। 7 वर्षीय मासूम पोते की मौत का सदमा सहन न कर पाने के कारण उसकी 55 वर्षीया दादी ने भी कुछ ही घंटों के अंतराल में दम तोड़ दिया।

नवोदय की तैयारी कर रहा था मासूम अंशुल धामनटूक निवासी परमाल धाकड़ का 7 वर्षीय इकलौता बेटा अंशुल गांव के स्कूल में चौथी कक्षा में पढ़ता था। होनहार अंशुल नवोदय विद्यालय में प्रवेश की तैयारी कर रहा था और इसी सिलसिले में कुछ महीने पहले ही कोलारस आकर अपनी दादी शांतिबाई धाकड़ के साथ रह रहा था।

इलाज के दौरान घटी दुखद घटना शनिवार सुबह अंशुल की तबीयत अचानक बिगड़ गई। दादी शांतिबाई ने तुरंत उसके पिता परमाल को सूचना दी। पिता बच्चे को इलाज के लिए शिवपुरी के एक निजी अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों को विश्वास नहीं हुआ, तो वे उसे शिवपुरी जिला अस्पताल ले गए, पर वहां भी उसकी मौत की पुष्टि हुई।

इसके बाद एक रिश्तेदार की सलाह पर परिजन अंशुल को लेकर गुना के निजी अस्पताल के लिए रवाना हुए। इस बीच, मासूम की मौत के गहरे सदमे में रास्ते में ही दादी शांतिबाई की तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिजनों ने दादी को बदरवास स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया और बच्चे को लेकर आगे बढ़े, जहां डॉक्टरों ने अंशुल की मौत की पुन: पुष्टि की।

मातम में बदला गांव, एक ही चिता पर अंतिम विदाई बच्चे के शव को लेकर लौट रहे परिजनों को रास्ते में ही खबर मिली कि बदरवास स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती दादी शांतिबाई ने भी दम तोड़ दिया है। मासूम पोते के बिछड़ने के सदमे ने दादी के प्राण पखेरू भी उड़ा दिए।

शनिवार शाम जब गांव में पोते और दादी की अर्थियां एक साथ उठीं, तो वहां मौजूद ग्रामीणों और परिजनों का कलेजा मुंह को आ गया। एक ही परिवार से कुछ ही घंटों में दो अर्थियां उठने से पूरा धामनटूक गांव मातम में डूब गया। नम आंखों और गमगीन माहौल के बीच दोनों का एक साथ अंतिम संस्कार किया गया।

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