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Shivpuri News : शिक्षक और दबंगों के चंगुल में दतुला: 100 बीघा वन भूमि हथियाई, मवेशियों का निवाला छीना

शिवपुरी जिले की नरवर तहसील स्थित ग्राम दतुला में इन दिनों प्रशासनिक उदासीनता और दबंगों की मनमानी का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। गांव के निवासी पिछले काफी समय से एक विकट संकट का सामना कर रहे हैं, जहां उनकी जीवन रेखा मानी जाने वाली सरकारी जमीन और सार्वजनिक रास्ते पर कुछ दबंगों ने कब्जा जमा लिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि जसवंत सिंह गुर्जर और लखन सिंह गुर्जर पुत्रगण पीतम सिंह ने गांव के मुख्य आम रास्ते को ही अवरुद्ध कर दिया है, जिससे ग्रामीणों का दैनिक आवागमन पूरी तरह से बाधित हो गया है। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब गांव के ही हाकिम सिंह गुर्जर नामक शिक्षक पर अपने पद का रौब दिखाकर सरकारी जमीन पर पक्का मकान बनाने और वन विभाग की बेशकीमती भूमि पर अवैध कब्जा करने के गंभीर आरोप लगे हैं।

ग्रामीणों के अनुसार, सर्वे नंबर 81, 84 और 667/1 जैसी महत्वपूर्ण सरकारी जमीनों को निजी संपत्ति की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन सबसे चौंकाने वाला खुलासा वन विभाग की जमीन सर्वे नंबर 668 को लेकर हुआ है। इस करीब 100 बीघा बड़े रकबे पर कब्जा कर खेती की जा रही है, जो जमीन पहले गांव के मवेशियों के लिए एकमात्र चरागाह हुआ करती थी। इस चरागाह के छिन जाने से अब पशुपालक भीषण संकट में हैं, क्योंकि उन्हें अपने पशुओं को चराने के लिए मीलों दूर भटकना पड़ रहा है, जिससे उनकी रोजी-रोटी पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

बंटी गुर्जर, अरविंद, धर्मेंद्र सिंह, केदार सिंह, मोहन सिंह, रामनिवास, नारायण, रामवीर, गजेंद्र, रामकिशन और सुनील समेत दर्जनों ग्रामीण प्रशासनिक अधिकारियों के दफ्तरों के कई चक्कर काट चुके हैं, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। अपनी व्यथा लेकर अंततः गुरुवार दोपहर 12 बजे सभी पीड़ित ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर तथा वन विभाग के डीएफओ को लिखित शिकायत सौंपकर तत्काल दखल की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से साफ कह दिया है कि यदि आठ दिनों के भीतर उनके रास्ते को बहाल नहीं किया गया और वन भूमि सहित अन्य सरकारी जमीनों को अतिक्रमण मुक्त नहीं कराया गया, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। अब देखना यह है कि प्रशासन इस दबंगई पर क्या कार्रवाई करता है और क्या दतुला के ग्रामीणों को उनका हक वापस मिल पाता है।

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