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जनसुनवाई की त्रासदी और व्यवस्था के सामने यक्ष प्रश्न



शिवपुरी कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में अपनी किसी फरियाद को लेकर पहुंचे एक 70 वर्षीय बुजुर्ग की अचानक तबीयत बिगड़ने और तत्पश्चात मृत्यु की खबर अत्यंत दुखद एवं व्यथित करने वाली है। बदरवास तहसील के ग्राम सड़बूड़ निवासी श्री बादल सिंह यादव न्याय और राहत की आस में कलेक्ट्रेट सभाकक्ष पहुंचे थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। इस हृदयविदारक घटना ने जहां एक परिवार पर दुखों का पहाड़ तोड़ दिया है, वहीं प्रशासनिक आयोजनों में स्वास्थ्य सुरक्षा इंतजामों की व्यवस्था पर भी गंभीर विमर्श की जरूरत को रेखांकित किया है।
प्रशासनिक तथ्यों और परिजनों के बयानों से यह स्पष्ट है कि मृतक पूर्व से ही गंभीर हृदय रोग से पीड़ित थे। वर्ष 2014 में आए मेजर हार्ट अटैक के बाद भोपाल के विशेषज्ञों से उनका सतत इलाज चल रहा था। घर से वे शिवपुरी दवाइयां लेने निकले थे और साथ ही जनसुनवाई में अपना आवेदन देने पहुंचे थे। घटना के समय उनका बेटा भी आईसीयू में जिंदगी की जंग लड़ रहा था, जो इस परिवार की मानसिक और शारीरिक पीड़ा की भयावहता को दर्शाता है।
इस दुखद मोड़ पर जिला प्रशासन की त्वरित प्रतिक्रिया और संवेदनशीलता सराहनीय रही। घटना घटते ही मौके पर मौजूद चिकित्सक द्वारा प्राथमिक परीक्षण, तत्काल एम्बुलेंस की व्यवस्था और जिला चिकित्सालय पहुंचाना—प्रशासन के सजग रवैये को दर्शाता है। पुलिस प्रशासन द्वारा वैधानिक प्रक्रिया का पालन और परिजनों से तुरंत संपर्क साधना भी उचित कदम रहा।
हमारा दृष्टिकोण:
यह घटना भले ही एक चिकित्सीय आपातस्थिति और व्यक्तिगत बीमारी का दुखद परिणाम रही हो, लेकिन यह हर सार्वजनिक और प्रशासनिक स्थल के लिए एक बड़ा सबक है। जनसुनवाई जैसे आयोजनों में दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से अक्सर बुजुर्ग, बीमार और असहाय नागरिक अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद में आते हैं। ऐसे में भविष्य के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाना आवश्यक प्रतीत होता है:
  1. वरिष्ठ नागरिकों और मरीजों के लिए प्राथमिकता: टोकन व्यवस्था के साथ-साथ अत्यंत वृद्ध, दिव्यांग या अस्वस्थ दिखने वाले आवेदकों के लिए 'फास्ट-ट्रैक' या प्राथमिकता के आधार पर आवेदन सुनने की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि उन्हें घंटों इंतजार न करना पड़े।
  1. आपातकालीन चिकित्सा स्टॉल: कलेक्ट्रेट जैसे स्थानों पर जहां सैकड़ों लोगों की भीड़ जुटती है, वहां केवल एक चिकित्सक की उपस्थिति ही नहीं, बल्कि 'इमरजेंसी फर्स्ट-एड किट', ओआरएस/जल व्यवस्था और एक समर्पित मेडिकल डेस्क की स्थाई व्यवस्था होनी चाहिए।
  1. मानवीय संवेदनशीलता: फरियादियों के बैठने, पानी और छाया की मुकम्मल व्यवस्था को और बेहतर करने की आवश्यकता है ताकि मानसिक तनाव से जूझ रहे नागरिकों को कम से कम शारीरिक कष्ट न भोगना पड़े।
श्री बादल सिंह यादव का असमय जाना एक अपूरणीय क्षति है। दुख की इस घड़ी में पूरी संवेदनाएं पीड़ित परिवार के साथ हैं। उम्मीद है कि प्रशासन इस त्रासदी से सबक लेते हुए अपनी जनसुनवाई व्यवस्था में ऐसे सुधार करेगा जिससे भविष्य में किसी भी फरियादी को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।

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