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शिवपुरी में बड़ा भू-माफिया कांड? विधायक देवेंद्र जैन और तहसीलदार पर 18 बीघा ज़मीन पर कब्ज़े का गंभीर आरोप!

शिवपुरी: विधायक देवेंद्र जैन और तहसीलदार पर 18 बीघा ज़मीन पर कब्ज़े का आरोप, व्यापारी ने खोले राज


Shivpuri News Today: मध्य प्रदेश के शिवपुरी से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ कलेक्ट्रेट जनसुनवाई में शहर के जाने-माने व्यापारी आनंद गोयल ने सत्ता के रसूख और प्रशासनिक मिलीभगत का एक बड़ा खुलासा किया है। व्यापारी का आरोप है कि उन्होंने केवल 9 बीघा ज़मीन बेची थी, लेकिन विधायक देवेंद्र जैन और उनके समर्थकों ने 18 बीघा ज़मीन पर अवैध कब्ज़ा कर लिया है।


9 बीघा बेची, 18 बीघा पर कब्ज़ा: जनसुनवाई में गुहार

मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुँचे व्यापारी आनंद गोयल ने शिवपुरी विधायक देवेंद्र जैन, उनके पुत्र सक्षम जैन, तहसीलदार सिद्धार्थ भूषणशर्मा और संबंधित पटवारी के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई।

गोयल का कहना है कि:

 उन्होंने करीब 9 बीघा भूमि बेची थी, लेकिन मौके पर 18 बीघा भूमि पर कब्ज़ा कर खेती की जा रही है।

 शिकायत करने पर उन्हें अलग-अलग माध्यमों से दबाने और धमकाने की कोशिश की जा रही है।

 वे इससे पहले भी कलेक्टर को कई बार आवेदन दे चुके हैं, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई।

3 साल से एक ही जगह जमे तहसीलदार पर उठाए सवाल

व्यापारी ने शिवपुरी तहसीलदार सिद्धार्थ भूषण शर्मा की कार्यप्रणाली और कार्यकाल पर सीधे सवाल दागे। गोयल का आरोप है कि तहसीलदार को शिवपुरी में पदस्थ हुए 3 साल से अधिक समय हो चुका है, लेकिन उनका स्थानांतरण (Transfer) नहीं किया गया। उन्होंने अधिकारियों और भू-माफियाओं के बीच गहरे गठजोड़ का आरोप लगाते हुए कहा कि तहसील स्तर पर न्याय मिलना असंभव हो गया है।

सिंधिया के 'भू-माफिया मुक्त क्षेत्र' के दावे की निकली हवा?

आनंद गोयल ने हाल ही में दिशा समिति की बैठक में केंद्रीय मंत्री और क्षेत्रीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के बयान की याद दिलाई। सिंधिया ने कहा था कि “संसदीय क्षेत्र से भू-माफिया और रेत माफिया को जड़ से उखाड़ फेंका जाएगा।”

व्यापारी ने तंज कसते हुए कहा कि जब विधायक और प्रशासनिक अधिकारी ही इस तरह के मामलों में घिरे होंगे, तो आम जनता को सिंधिया के दावों का लाभ कैसे मिलेगा?

निष्पक्ष जाँच और कार्रवाई की माँग

पीड़ित व्यापारी ने प्रशासन से माँग की है कि:

1. राजस्व रिकॉर्ड और मौके की स्थिति का तत्काल सीमांकन (Delimitation) कराया जाए।

2. ज़मीन के असली दस्तावेज़ों की निष्पक्ष जाँच हो।

3. दोषी पाए जाने वाले जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

(नोट: इस मामले में विधायक देवेंद्र जैन, सक्षम जैन, तहसीलदार सिद्धार्थ भूषण शर्मा या पटवारी का आधिकारिक पक्ष अभी सामनेनहीं आया है। उनका पक्ष आते ही खबर को अपडेट किया 

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