'अजब एमपी, गजब एमपी'
खुद कत्ली ही अपना कातिल निकला
श्रीगोपाल गुप्ता
मध्य प्रदेश में बीता गत सप्ताह भारतीय जनता पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए अच्छा नहीं गुजरा। गत 17 जनवरी को उनके नेता और मंदसौर नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष प्रहलाद बंधनवार की नृशंस हत्या से शुरु हुआ मामला 23 जनवरी आते-आते रतलाम जिले के कमेड़ ग्राम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला घोष प्रमुख संजय पाटीदार के 36 वर्षिय छोटे भाई एवं आरआरएस के पूर्व शिवनगर मंडल प्रमुख हिम्मत पाटीदार की गला रेत कर की गई हत्या पर अटक गया। इस बीच 20 जनवरी को ग्रहमंत्री वाला बच्चन के ग्रह जिले बड़वानी में बलवाड़ी मंडल भाजपा प्रमुख मनोज ठाकरे की धारदार हथियारों से हत्या और 21 जनवरी को ग्वालियर ग्रामिण भाजपा के मंत्री नरेन्द्र रावत के भाई पेशे से बस कंडटर मटर चतर सिंह की हत्या ने भाजपा और प्रदेश को हिला दिया। भाजपा ने अपने नेताओं की हत्या के खिलाफ कांग्रेस की राज्य सरकार को घेरते हुये 21 जनवरी को पूरे प्रदेश में जिला मुख्यालयों पर धरना प्रदर्शन करते हुये राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन दिया। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवराज सिंह चौहान ने गत 15 वर्षों से अपने शासनकाल में काबिल रही प्रदेश की पुलिस पर अविश्वास व्यक्त करते हुये कातिलों की गिरफ्तारी के लिये मामले को सीबीआई को सोंपने की मांग कर दी। अब ये अलग बात है कि खुद 13 साल के अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल में शिवराज सिंह बड़ी से बड़ी घटनाओं की जांच सीबीआई से कराने के इच्छुक कभी नहीं रहे। यहां तक की हत्यारे व्यापम कांड की जांच भी सीबीआई से कराने से इनकार करते रहे। बहरहाल भाजपा नेताओं की ताबड़तोड़ हत्याओं से थर्राये प्रदेश की पुलिस ने हत्यारों पर शिंकजा कशा तो मंदसौर नगर पालिका अध्यक्ष प्रहलाद बंधनवार की नृशंस हत्या में उनके ही खास और भाजपा नेता मनीष बैरागी धरे गये,मामला पांच लाख रुपये न लोटाने का था। इधर ग्वालियर ग्रामिण भाजपा के मंत्री नरेन्द्र रावत के भाई मटक की हत्या आशिकी और उधार रकम न चुकाने के कारण हुई। ये हत्या मटक की साली के पति उदय भान सिंह ने उसे शराब पिलाकर गांव की पार्वती नदी के पुल के पास धारदार हथियार से कर दी।
सबसे हैरतअंगेज हत्या का मामला तो रतलाम जिले के राष्ट्रीय स्यंमसेवक संघ के घोष प्रमुख संजय पाटीदार के भाई हिम्मत पाटीदार का निकला। पुलिस जांच में सामने आया कि यहां तो खुद कत्ली हिम्मत पाटीदार ही अपना कातिल निकला। दरअसल अनाप-शनाप कर्ज के बोझ तले दबा हिम्मत पाटीदार ने खुद की कद-काठी से मिलते-जुलते अपने नोकर और गांव के ही मदन मालवीय की नृशंसता से हत्या कर पहचान छुपाने के लिए उसका चेहरा जला दिया।इसके साथ ही मृतक की जेब में अपना मोबाइल और कागजात रखकर उसे खुद की पहचान दे दी। जब लाश मिली तो उसकी शिनाख़्त हिम्मत पाटीदार के रुप में सामने आई, उसके शव को अनेक भाजपा नेताओं ने कंधा देते हुये प्रदेश की कांग्रेस सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई ।मगर पुलिस ने तहकीकात की तो मामला चोंकाने वाला सामने आया। अपना कर्ज चुकाने के लिए हिम्मत ने बीमा के 20 लाख रुपये ऐंठने के लिए गांव के ही निर्दोष मदन मालवीय को मोत के घाट उतार दिया। अब इसे बिंडवना ही कहेंगे कि आर आर एस जैसे सामाजिक संगठन का एक जिम्बेदार पदाधिकारी होने के बावजूद हिम्मत ने अपने स्वार्थ के लिए एक निर्दोष की जान ले ली। इधर हिम्मत पाटीदार की कथित हत्या को लेकर जमीं-आसमां एक कर देने वाली भाजपा और उसके नेता अब चुप हैं, क्योकि मदन मालवीय एक सीधा-साधा मजदूर था जिसका भाजपा से कोई रिस्ता नहीं था। भाजपा नेताओं की गत सप्ताह हुई ताबड़तोड़ हत्याओं के लिए क्या केवल प्रदेश की सरकार और कानून-व्यवस्था ही जिम्बेदार है? या फिर ये भाजपा के लिये भी आत्म चिंतन का समय है।
खुद कत्ली ही अपना कातिल निकला
श्रीगोपाल गुप्ता
मध्य प्रदेश में बीता गत सप्ताह भारतीय जनता पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए अच्छा नहीं गुजरा। गत 17 जनवरी को उनके नेता और मंदसौर नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष प्रहलाद बंधनवार की नृशंस हत्या से शुरु हुआ मामला 23 जनवरी आते-आते रतलाम जिले के कमेड़ ग्राम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला घोष प्रमुख संजय पाटीदार के 36 वर्षिय छोटे भाई एवं आरआरएस के पूर्व शिवनगर मंडल प्रमुख हिम्मत पाटीदार की गला रेत कर की गई हत्या पर अटक गया। इस बीच 20 जनवरी को ग्रहमंत्री वाला बच्चन के ग्रह जिले बड़वानी में बलवाड़ी मंडल भाजपा प्रमुख मनोज ठाकरे की धारदार हथियारों से हत्या और 21 जनवरी को ग्वालियर ग्रामिण भाजपा के मंत्री नरेन्द्र रावत के भाई पेशे से बस कंडटर मटर चतर सिंह की हत्या ने भाजपा और प्रदेश को हिला दिया। भाजपा ने अपने नेताओं की हत्या के खिलाफ कांग्रेस की राज्य सरकार को घेरते हुये 21 जनवरी को पूरे प्रदेश में जिला मुख्यालयों पर धरना प्रदर्शन करते हुये राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन दिया। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवराज सिंह चौहान ने गत 15 वर्षों से अपने शासनकाल में काबिल रही प्रदेश की पुलिस पर अविश्वास व्यक्त करते हुये कातिलों की गिरफ्तारी के लिये मामले को सीबीआई को सोंपने की मांग कर दी। अब ये अलग बात है कि खुद 13 साल के अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल में शिवराज सिंह बड़ी से बड़ी घटनाओं की जांच सीबीआई से कराने के इच्छुक कभी नहीं रहे। यहां तक की हत्यारे व्यापम कांड की जांच भी सीबीआई से कराने से इनकार करते रहे। बहरहाल भाजपा नेताओं की ताबड़तोड़ हत्याओं से थर्राये प्रदेश की पुलिस ने हत्यारों पर शिंकजा कशा तो मंदसौर नगर पालिका अध्यक्ष प्रहलाद बंधनवार की नृशंस हत्या में उनके ही खास और भाजपा नेता मनीष बैरागी धरे गये,मामला पांच लाख रुपये न लोटाने का था। इधर ग्वालियर ग्रामिण भाजपा के मंत्री नरेन्द्र रावत के भाई मटक की हत्या आशिकी और उधार रकम न चुकाने के कारण हुई। ये हत्या मटक की साली के पति उदय भान सिंह ने उसे शराब पिलाकर गांव की पार्वती नदी के पुल के पास धारदार हथियार से कर दी।
सबसे हैरतअंगेज हत्या का मामला तो रतलाम जिले के राष्ट्रीय स्यंमसेवक संघ के घोष प्रमुख संजय पाटीदार के भाई हिम्मत पाटीदार का निकला। पुलिस जांच में सामने आया कि यहां तो खुद कत्ली हिम्मत पाटीदार ही अपना कातिल निकला। दरअसल अनाप-शनाप कर्ज के बोझ तले दबा हिम्मत पाटीदार ने खुद की कद-काठी से मिलते-जुलते अपने नोकर और गांव के ही मदन मालवीय की नृशंसता से हत्या कर पहचान छुपाने के लिए उसका चेहरा जला दिया।इसके साथ ही मृतक की जेब में अपना मोबाइल और कागजात रखकर उसे खुद की पहचान दे दी। जब लाश मिली तो उसकी शिनाख़्त हिम्मत पाटीदार के रुप में सामने आई, उसके शव को अनेक भाजपा नेताओं ने कंधा देते हुये प्रदेश की कांग्रेस सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई ।मगर पुलिस ने तहकीकात की तो मामला चोंकाने वाला सामने आया। अपना कर्ज चुकाने के लिए हिम्मत ने बीमा के 20 लाख रुपये ऐंठने के लिए गांव के ही निर्दोष मदन मालवीय को मोत के घाट उतार दिया। अब इसे बिंडवना ही कहेंगे कि आर आर एस जैसे सामाजिक संगठन का एक जिम्बेदार पदाधिकारी होने के बावजूद हिम्मत ने अपने स्वार्थ के लिए एक निर्दोष की जान ले ली। इधर हिम्मत पाटीदार की कथित हत्या को लेकर जमीं-आसमां एक कर देने वाली भाजपा और उसके नेता अब चुप हैं, क्योकि मदन मालवीय एक सीधा-साधा मजदूर था जिसका भाजपा से कोई रिस्ता नहीं था। भाजपा नेताओं की गत सप्ताह हुई ताबड़तोड़ हत्याओं के लिए क्या केवल प्रदेश की सरकार और कानून-व्यवस्था ही जिम्बेदार है? या फिर ये भाजपा के लिये भी आत्म चिंतन का समय है।

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