कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की पहली लिस्ट गुरुवार शाम को जारी कर दी है. इस लिस्ट ने सोनिया गांधी के रिटायरमेंट संबंधित अटकलों पर विराम लगा दिया है. सोनिया फिर कांग्रेस के गढ़ रायबरेली से चुनाव लड़ेंगी. वर्ष 2004 से सोनिया यहां से चुनी जा रही हैं. इससे पहले अटकलें थी कि प्रियंका गांधी वाड्रा परिवार के गढ़ में अपनी मां का पदभार संभालेंगी. हालांकि सोनिया गांधी के रिटायरमेंट के लिए अभी इंतजार करना होगा और इसके कई राजनीतिक मायने हैं.दरअसल, कड़ी मेहनत और कुशल रणनीति, सोनिया की राजनीति को रेखांकित करती है. कांग्रेस के लिए यह महत्वपूर्ण समय है और इस समय राजनीतिक गठजोड़ 'महागठबंधन' का ही सहारा है. इसको लेकर लगातार कोशिशें भी की जा रही हैं. गठजोड़ के प्रयासों के लिए सोनिया ज्यादा मजबूत साबित हो सकती हैं. कई गठबंधन सहयोगी और संभावित लोगों का कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की बजाय सोनिया गांधी से ज्यादा अच्छा तालमेल है. वह सोनिया गांधी के सामने अपनी बात रखने और उनके बातचीत करना ज्यादा पसंद करेंगे.इसका एक स्पष्ट उदाहरण तब सामने आया जब तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने यह कहा था कि वह सोनिया गांधी के साथ अधिक सहज थीं. जबकि राहुल गांधी को अभी कुछ समय चाहिए. हालांकि राहुल ने राजनीति में एक लंबा सफर तय किया है और पिछले एक साल में उनके अंदर ज्यादा बदलाव देखा गया है. उनकी मां को उनसे उम्मीदें भी हैं.कई नेताओं को अभी भी ऐसा लगता है कि सोनिया गांधी का राजनीतिक भविष्य बरकरार है. वहीं यूपी में कांग्रेस का बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित करने के लिए प्रियंका गांधी यूपी के चुनाव पर फोकस कर रही हैं. उनके चुनाव लड़ने से यूपी में पार्टी का प्रदर्शन सुधारने की मुख्य प्राथमिकता पर असर पड़ सकता है.यह भी पढ़ें: अपनों के पाकिस्तान की जेलों से लौटने के इंतज़ार में गुजरात के 500 परिवारगांधी परिवार के सभी लोग जानते हैं कि कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव बनने के बाद पूरे देश की नजरें प्रियंका गांधी पर हैं. ऐसे में यदि आम चुनाव में उनका प्रदर्शन खराब रहता है, तो उससे यह परसेप्शन समाप्त हो जाएगा कि प्रियंका कांग्रेस के लिए ट्रंप कार्ड हैं और वे पार्टी को चुनाव जीताने में सक्षम हैं. इसका असर राहुल गांधी के राजनीतिक कॅरियर पर भी पड़ेगा. अगर प्रियंका को रायबरेली से मैदान में उतारा जाता, तो उनके खिलाफ अफवाहों का दौर शुरू हो जाता. पार्टी के फैसलो में भी भाई-बहन का एकाधिकार संबंधित बातें निकलकर सामने आतीं.अब उम्मीदवारों की पहली सूची में प्रियंका गांधी का नाम नहीं आने से कांग्रेस ने यह साबित कर दिया है कि सोनिया गांधी अभी भी सक्रिय राजनीति में हैं और मां का पदभार संभालने में अभी वक्त हैं. इससे एक मैसेज जाएगा कि प्रियंका को संगठन के निर्माण और चुनाव प्रचार पर ध्यान केंद्रित करना है.सोनिया गांधी के खराब स्वास्थ्य और सार्वजनिक कार्यक्रमों में कम भागीदारी के कारण उनके रिटायरमेंट संबंधित अटकलें लगाई जा रही थीं. उन्होंने पिछले काफी समय से अपने निर्वाचन क्षेत्र का भी दौरा नहीं किया है. आखिरी बार जब वे क्षेत्र का दौरा करने वाली थीं, तब स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण उन्हें दौरा को रद्द करना पड़ा. उसके बाद से उनके क्षेत्र की जिम्मेदारी प्रियंका गांधी संभाल रही थीं. वहीं से कयास लगाए गए कि प्रियंका चुनाव लड़ सकती हैं.यह भी पढ़ें: पुलिस खरीद सके CCTV उसके लिए 9 साल की बच्ची ने बर्थडे पार्टी के डेढ़ लाख रुपए किए दानकांग्रेस चाहती है कि रायबरेली की सीट गांधी परिवार के बाहर के किसी भी कांग्रेसी को नहीं दी जाए क्योंकि कांग्रेस के अनुसार, रायबरेली सीट से पार्टी का जीतना तय है. ऐसा भी माना जा रहा है कि यदि सोनिया गांधी इस सीट से चुनाव लड़ेंगी तो इससे बाद में प्रियंका गांधी को फायदा होगा.यदि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अमेठी लोकसभा सीट छोड़कर रायबरेली से चुनाव लड़ते हैं तो उससे यह संदेश जाएगा कि वे केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के खिलाफ लड़ने से बचना चाहते हैं, इसलिए इस बात की संभावना बहुत अधिक है कि सोनिया गांधी लोकसभा चुनाव में रायबरेली से ही चुनाव लड़ेंगी.रायबरेली लोकसभा क्षेत्र में अपनी अच्छी छवि के कारण वे इस बार भी वहीं से चुनाव लड़ेंगी, क्योंकि वे वहां से आसानी से चुनाव जीत जाएंगी. बीजेपी उन्हें कड़े मुकाबले में फंसाना चाहती है. पीएम नरेंद्र मोदी ने हाल ही में रायबरेली में एक प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया था. इससे पहले केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने अमेठी का दौरा किया था.प्रियंका गांधी इस समय पूर्वी यूपी की सभी सीटों पर ध्यान दे रही हैं. अगर वे रायबरेली से चुनाव लड़ती तो उन्हें यहां ज्यादा ध्यान देना पड़ता. बड़े पैमाने पर अभियान चलाना पड़ता. पार्टी सूत्रों के अनुसार, भविष्य में उनके चुनाव लड़ने से इंकार नहीं किया जाना
कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की पहली लिस्ट गुरुवार शाम को जारी कर दी है. इस लिस्ट ने सोनिया गांधी के रिटायरमेंट संबंधित अटकलों पर विराम लगा दिया है. सोनिया फिर कांग्रेस के गढ़ रायबरेली से चुनाव लड़ेंगी. वर्ष 2004 से सोनिया यहां से चुनी जा रही हैं. इससे पहले अटकलें थी कि प्रियंका गांधी वाड्रा परिवार के गढ़ में अपनी मां का पदभार संभालेंगी. हालांकि सोनिया गांधी के रिटायरमेंट के लिए अभी इंतजार करना होगा और इसके कई राजनीतिक मायने हैं.दरअसल, कड़ी मेहनत और कुशल रणनीति, सोनिया की राजनीति को रेखांकित करती है. कांग्रेस के लिए यह महत्वपूर्ण समय है और इस समय राजनीतिक गठजोड़ 'महागठबंधन' का ही सहारा है. इसको लेकर लगातार कोशिशें भी की जा रही हैं. गठजोड़ के प्रयासों के लिए सोनिया ज्यादा मजबूत साबित हो सकती हैं. कई गठबंधन सहयोगी और संभावित लोगों का कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की बजाय सोनिया गांधी से ज्यादा अच्छा तालमेल है. वह सोनिया गांधी के सामने अपनी बात रखने और उनके बातचीत करना ज्यादा पसंद करेंगे.इसका एक स्पष्ट उदाहरण तब सामने आया जब तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने यह कहा था कि वह सोनिया गांधी के साथ अधिक सहज थीं. जबकि राहुल गांधी को अभी कुछ समय चाहिए. हालांकि राहुल ने राजनीति में एक लंबा सफर तय किया है और पिछले एक साल में उनके अंदर ज्यादा बदलाव देखा गया है. उनकी मां को उनसे उम्मीदें भी हैं.कई नेताओं को अभी भी ऐसा लगता है कि सोनिया गांधी का राजनीतिक भविष्य बरकरार है. वहीं यूपी में कांग्रेस का बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित करने के लिए प्रियंका गांधी यूपी के चुनाव पर फोकस कर रही हैं. उनके चुनाव लड़ने से यूपी में पार्टी का प्रदर्शन सुधारने की मुख्य प्राथमिकता पर असर पड़ सकता है.यह भी पढ़ें: अपनों के पाकिस्तान की जेलों से लौटने के इंतज़ार में गुजरात के 500 परिवारगांधी परिवार के सभी लोग जानते हैं कि कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव बनने के बाद पूरे देश की नजरें प्रियंका गांधी पर हैं. ऐसे में यदि आम चुनाव में उनका प्रदर्शन खराब रहता है, तो उससे यह परसेप्शन समाप्त हो जाएगा कि प्रियंका कांग्रेस के लिए ट्रंप कार्ड हैं और वे पार्टी को चुनाव जीताने में सक्षम हैं. इसका असर राहुल गांधी के राजनीतिक कॅरियर पर भी पड़ेगा. अगर प्रियंका को रायबरेली से मैदान में उतारा जाता, तो उनके खिलाफ अफवाहों का दौर शुरू हो जाता. पार्टी के फैसलो में भी भाई-बहन का एकाधिकार संबंधित बातें निकलकर सामने आतीं.अब उम्मीदवारों की पहली सूची में प्रियंका गांधी का नाम नहीं आने से कांग्रेस ने यह साबित कर दिया है कि सोनिया गांधी अभी भी सक्रिय राजनीति में हैं और मां का पदभार संभालने में अभी वक्त हैं. इससे एक मैसेज जाएगा कि प्रियंका को संगठन के निर्माण और चुनाव प्रचार पर ध्यान केंद्रित करना है.सोनिया गांधी के खराब स्वास्थ्य और सार्वजनिक कार्यक्रमों में कम भागीदारी के कारण उनके रिटायरमेंट संबंधित अटकलें लगाई जा रही थीं. उन्होंने पिछले काफी समय से अपने निर्वाचन क्षेत्र का भी दौरा नहीं किया है. आखिरी बार जब वे क्षेत्र का दौरा करने वाली थीं, तब स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण उन्हें दौरा को रद्द करना पड़ा. उसके बाद से उनके क्षेत्र की जिम्मेदारी प्रियंका गांधी संभाल रही थीं. वहीं से कयास लगाए गए कि प्रियंका चुनाव लड़ सकती हैं.यह भी पढ़ें: पुलिस खरीद सके CCTV उसके लिए 9 साल की बच्ची ने बर्थडे पार्टी के डेढ़ लाख रुपए किए दानकांग्रेस चाहती है कि रायबरेली की सीट गांधी परिवार के बाहर के किसी भी कांग्रेसी को नहीं दी जाए क्योंकि कांग्रेस के अनुसार, रायबरेली सीट से पार्टी का जीतना तय है. ऐसा भी माना जा रहा है कि यदि सोनिया गांधी इस सीट से चुनाव लड़ेंगी तो इससे बाद में प्रियंका गांधी को फायदा होगा.यदि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अमेठी लोकसभा सीट छोड़कर रायबरेली से चुनाव लड़ते हैं तो उससे यह संदेश जाएगा कि वे केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के खिलाफ लड़ने से बचना चाहते हैं, इसलिए इस बात की संभावना बहुत अधिक है कि सोनिया गांधी लोकसभा चुनाव में रायबरेली से ही चुनाव लड़ेंगी.रायबरेली लोकसभा क्षेत्र में अपनी अच्छी छवि के कारण वे इस बार भी वहीं से चुनाव लड़ेंगी, क्योंकि वे वहां से आसानी से चुनाव जीत जाएंगी. बीजेपी उन्हें कड़े मुकाबले में फंसाना चाहती है. पीएम नरेंद्र मोदी ने हाल ही में रायबरेली में एक प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया था. इससे पहले केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने अमेठी का दौरा किया था.प्रियंका गांधी इस समय पूर्वी यूपी की सभी सीटों पर ध्यान दे रही हैं. अगर वे रायबरेली से चुनाव लड़ती तो उन्हें यहां ज्यादा ध्यान देना पड़ता. बड़े पैमाने पर अभियान चलाना पड़ता. पार्टी सूत्रों के अनुसार, भविष्य में उनके चुनाव लड़ने से इंकार नहीं किया जाना

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