कमिश्नर श्रीमती कल्पना श्रीवास्तव ने संभाग के सभी कलेक्टर्स को निर्देश दिए है कि वे लगातार बढ़ते तापमान के दृष्टिगत अपने जिलों को हरा और शीतल बनाने के लिए एक्शन प्लान के तहत क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। उन्होंने पेड़ लगाने के साथ उनकी ग्रोथ के लिए जरूरी उपायों पर विशेष जोर देने की अपेक्षा की है।
कलेक्टर्स से कहा गया है कि वे भोपाल की तर्ज पर इस कार्य में अधिकतम जन सहभागिता सुनिश्चित करें। पौधरोपण की मांग एवं पूर्ति के लिए एप्प बनाने, पौधों की मार्किंग करने और पौधरोपण के सामाजिक अंकेक्षण के साथ ही 90 फीसदी उत्तरजीविका के प्रयास करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि नागरिकों को पौधें उपलब्ध कराने के लिए स्थानीय नगरीय निकाय और वन विभाग को दायित्व सौंपा जाए।
कमिश्नर ने निर्देश दिए हैं कि वे ग्रामवासी/शहरवासियों के घरों में नाम-आंवला, जामुन, अमरूद, आम, नींबू, सीताफल, बेल, मुनगा, अर्जुन, हर्रा बहेड़ा, महुआ, चिरौंजी, कदम, जैसे पौधे लगवाएं। एजेंसियों द्वारा रोपित किये जाने वाले पौधों की प्रजातियों में अशोक, आंवला, कटहल, कदम्ब, करंज, कालासिरस, कुसुम, कोसियान्सामिदा, पुत्रजीवा, जायफल, जामुन, दूधी नीबू, नीम, पीपल, पेल्टाफार्म, बीजा, बरगद, वांस, मोलश्री, वेलपत्र, महुआ, मीठानीम, साजा, सतपर्णी, सफेद सिरस, सागौन, सिस्सू, सीताफल, मुनगा जैसे पौधे लगाएं तथा धार्मिक स्थलों से वितरित किये जाने वाले पौधों की प्रजाति तुलसी, बेल, नीम, आंवला, पीपल, बरगद, पुत्रजीवा, सतपर्णी एवं आम जैसे पौधे लगवाएं।
कलेक्टर्स से कहा गया है कि वे राष्ट्रीय और राज्य राजमार्ग के दोनों तरफ, पहाड़ियों, झील और तालाब की मेढ़ों, खेत खलिहान, शहरी पार्को- नागरिकों के आवास, माइनिंग की बंद खदानों के आसपास, औद्योगिक और शैक्षणिक संस्थाओं, हाउसिंग बोर्ड की कालोनियों के साथ ही लोक निर्माण विभाग और प्रधानमंत्री सड़क के दोनों ओर वृक्षारोपण कराएं।
कलेक्टर्स से कहा गया है कि वे भोपाल की तर्ज पर इस कार्य में अधिकतम जन सहभागिता सुनिश्चित करें। पौधरोपण की मांग एवं पूर्ति के लिए एप्प बनाने, पौधों की मार्किंग करने और पौधरोपण के सामाजिक अंकेक्षण के साथ ही 90 फीसदी उत्तरजीविका के प्रयास करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि नागरिकों को पौधें उपलब्ध कराने के लिए स्थानीय नगरीय निकाय और वन विभाग को दायित्व सौंपा जाए।
कमिश्नर ने निर्देश दिए हैं कि वे ग्रामवासी/शहरवासियों के घरों में नाम-आंवला, जामुन, अमरूद, आम, नींबू, सीताफल, बेल, मुनगा, अर्जुन, हर्रा बहेड़ा, महुआ, चिरौंजी, कदम, जैसे पौधे लगवाएं। एजेंसियों द्वारा रोपित किये जाने वाले पौधों की प्रजातियों में अशोक, आंवला, कटहल, कदम्ब, करंज, कालासिरस, कुसुम, कोसियान्सामिदा, पुत्रजीवा, जायफल, जामुन, दूधी नीबू, नीम, पीपल, पेल्टाफार्म, बीजा, बरगद, वांस, मोलश्री, वेलपत्र, महुआ, मीठानीम, साजा, सतपर्णी, सफेद सिरस, सागौन, सिस्सू, सीताफल, मुनगा जैसे पौधे लगाएं तथा धार्मिक स्थलों से वितरित किये जाने वाले पौधों की प्रजाति तुलसी, बेल, नीम, आंवला, पीपल, बरगद, पुत्रजीवा, सतपर्णी एवं आम जैसे पौधे लगवाएं।
कलेक्टर्स से कहा गया है कि वे राष्ट्रीय और राज्य राजमार्ग के दोनों तरफ, पहाड़ियों, झील और तालाब की मेढ़ों, खेत खलिहान, शहरी पार्को- नागरिकों के आवास, माइनिंग की बंद खदानों के आसपास, औद्योगिक और शैक्षणिक संस्थाओं, हाउसिंग बोर्ड की कालोनियों के साथ ही लोक निर्माण विभाग और प्रधानमंत्री सड़क के दोनों ओर वृक्षारोपण कराएं।

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