18 साल से ज्यादा उम्र के युवाओं को कोरोना वैक्सीन लगाने के मुद्दे पर अब सियासत के अलग-अलग रूप देखने को मिल रहे हैं। 18 साल से ज्यादा उम्र वालों के फ्री वैक्सीनेशन पर अब कांग्रेस शासित राज्यों में ही अलग-अलग राय देखने को मिल रही है। छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने 18 साल से ज्यादा उम्र वालों को फ्री वैक्सीनेशन करवाने की घोषणा कर दी है। उधर, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार से 18 साल से ज्यादा उम्र वालों का फ्री वैक्सीनेशन करवाने की घोषणा करने की मांग करते हुए राज्यों पर भार नहीं डालने की बात कही है।
गहलोत ने सोशल मीडिया पर लिखा- कांग्रेस पार्टी और राज्यों द्वारा लगातार मांग करने के बाद केन्द्र सरकार ने 18 वर्ष से अधिक आयु वाले लोगों के वैक्सीनेशन का फैसला किया है, जिसका हम स्वागत करते हैं। केन्द्र सरकार को 18 वर्ष से अधिक आयु के युवाओं को भी फ्री वैक्सीन लगाने की घोषणा करनी चाहिए। फ्री वैक्सीन ना मिलने पर युवाओं का केंद्र सरकार के प्रति आक्रोश बढ़ेगा।
केंद्र सभी आयु वर्गों के लिए एक ही नीति अपनाए, केंद्र युवाओं पर न डाले वैक्सीनेशन का भार
गहलोत ने आगे लिखा- राज्यों में सभी आयुवर्ग के लोगों को एक ही मशीनरी (मेडिकल स्टाफ) वैक्सीन लगाएगी। यह उचित नहीं होगा कि युवाओं से पैसे लिए जाएं और बाकी को निशुल्क वैक्सीन लगाई जाए। केन्द्र सरकार को 60 वर्ष, 45 वर्ष और अब 18 वर्ष अधिक आयुवर्ग के वैक्सीनेशन के लिए एक ही नीति अपनानी चाहिए। यह घातक कोरोना वायरस अब तेजी से फैल रहा है, संक्रमितों की मृत्यु दर भी अधिक है। ऐसे में केन्द्र सरकार को वैक्सीन की कीमत का भार युवाओं पर ना डालकर तेजी से निशुल्क वैक्सीनेशन करना चाहिए।
राज्यों पर अतिरिक्त भार पड़ने से आमजन को परेशानियां आएंगी
गहलोत ने लिखा- कोविड के इस संकट में राज्यों पर अतिरिक्त भार पड़ने से आमजन को परेशानियां आएंगी, राज्यों में विकास कार्य भी प्रभावित होंगे। प्राइवेट सेक्टर को वैक्सीन लगाने की अनुमति देना स्वागतयोग्य कदम है। इससे सक्षम लोग वैक्सीन खरीद कर लगवा सकेंगे और सरकार पर भार भी कम होगा।
वैक्सीनेशन पर गहलोत- भूपेश बघेल की अलग राय का कारण जनसंख्या
कांग्रेस शासित दो राज्यों में 18 साल से ज्यादा उम्र वालों के फ्री वैक्सीनेशन को लेकर अलग अलग राय के पीछे प्रमुख कारण जनसंख्या है। छत्तीसगढ़ की कुल जनसंख्या से ज्यादा राजस्थान में 18 से 45 की आबादी है। छत्तीसगढ़ में करीब सवा करोड़ की आबादी इस आयु वर्ग में है जबकि राजस्थान में यह आंकड़ा 3 करोड़ है। दोनों डोज लगाने के लिए छत्तीसगढ़ को 2.5 करोड़ वैक्सीन की जरूरत होगी जबकि राजस्थान को 6 करोड़ डोज की जरूरत होगी। इस पर लागत ज्यादा आएगी। यही वजह है कि गहलोत ने अब तक फ्री वैक्सीनेशन की घोषणा नहीं की है।

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