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सचिन बोले- केंद्र सरकार वहन करे वैक्सीनेशन का खर्च, "वन नेशन, वन वैक्सीन, वन रेट" सबसे बड़ी जरूरत; चुनाव तो आते-जाते रहेंगे, दवाइयां नहीं मिली तो जनता माफ नहीं करेगी



 पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने वैक्सीन,ऑक्सीजन और रेमडेसिविर के प्रबंधन पर मोदी सरकार पर निशाना साधा है। पायलट ने तीनों मुद्दों पर राजस्थान सरकार के पक्ष में स्टैंड लिया है। पायलट ने कहा-इस समय देश में रोजाना तीन लाख से अधिक कोविड केस रिपोर्ट होने लगे हैं, सभी को प्रमुख रूप से जीवन बचाने पर ही ध्यान देना होगा। राजनीति और चुनाव तो आते जाते रहेंगे लेकिन समय पर जनता को वैक्सीन नहीं लगी और सभी जरूरतमंद मरीजों को ऑक्सीजन और रेमडेसिविर जैसी जीवन रक्षक दवाई नहीं मिली तो भविष्य की पीढ़ियां हमें माफ नहीं करेंगी।

पायलट ने कहा- जिस वैक्सीन को भारत सरकार दो निर्माताओं से 157 रुपए की दर से खरीद रही है, उसी वैक्सीन की 6 करोड़ डोज पीएम केयर फंड के माध्यम से एक निर्माता से 210 रुपए और 1 करोड़ डोज दूसरे निर्माता से 310 रुपए में खरीदी गई है। जिससे जनता के मन में सवाल उठ रहे हैं। एक ही वैक्सीन के तीन दाम तय करके भारत सरकार ने भविष्य के लिए जनता को भारी कठिनाई में डाल दिया है। यह बहुत ही विचित्र निर्णय है कि एक ही वैक्सीन भारत सरकार को 150 रुपए में, राज्य सरकारों को 400 रुपए में और निजी अस्पतालों को 600 रुपए में सप्लाई की जाएगी। "वन नेशन, वन वैक्सीन, वन रेट" आज की सबसे बड़ी जरूरत है, जिससे वैक्सीन की जमाखोरी और कालाबाजारी पर नियंत्रण हो सके।

केंद्र उठाए वैक्सीन का खर्च
पायलट ने कहा, सभी दलों की राज्य सरकारें कोविड के संकट से अपने संसाधनों के साथ पहले से ही जूझ रही हैं, ऐसे में वैक्सीन का खर्च केंद्र सरकार को ही वहन करना चाहिए। वैक्सीन की 6 करोड़ डोज के निर्यात पर प्रश्न उठाते हुए पायलट ने कहा कि ये बहुत ही अफसोसजनक है कि भारतीय वैक्सीन निर्माता को विदेशी सरकारों ने भारत सरकार से पहले ही आपूर्ति आदेश दे दिए थे।

ऑक्सीजन आपूर्ति के लिए हवाई जहाज का इस्तेमाल करें
पायलट ने ऑक्सीजन के विफल प्रबंधन पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि भारत के विश्व के प्रमुख ऑक्सीजन निर्माताओं में शामिल होने के बावजूद भी सरकार अपने मजबूर मरीजों को समय पर ऑक्सीजन नहीं नहीं दे पा रही। एक तरफ तो कोविड के एक साल में भारत सरकार ने 9300 मीट्रिक टन ऑक्सीजन के निर्यात की इजाजत दे दी और दूसरी तरफ इस एक साल में ऑक्सीजन की सुगम और समय पर हर अस्पताल में आपूर्ति के लिए समुचित व्यवस्थाएं नहीं की। पायलट ने सुझाव दिया है कि ऑक्सीजन आपूर्ति के लिए आवश्यक हो तो हवाई मार्ग का उपयोग किया जाए।

11 लाख रेमडेसिविर इंजेक्शन का निर्यात करने से हुई किल्लत ​पायलट ने कहा- पिछले छह महीनों में 11 लाख रेमडेसिविर इंजेक्शन का निर्यात करने की इजाजत देना आज देश के गंभीर मरीजों के लिए भारी पड़ रहा है। अस्पतालों में रेमडेसिविर नहीं है और इसकी कालाबाजारी होने लगी है, इतना ही नहीं नकली रेमडेसिविर के स्टॉक पकड़ में आ रहे हैं। पायलट ने अपील की है कि भारत सरकार को पारदर्शी तरीके से सभी राज्य सरकारों के साथ बात करके जनता के कष्ट को दूर करने के कदम उठाने होंगे।

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