भोपाल मप्र मंडी बोर्ड के अफसर-कर्मचारी की कोरोना से मौत होने पर 25 लाख रुपए का मुआवजा देने वाली कृषि मंत्री कमल पटेल की घोषणा को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मंत्री के एलान के बाद मंडी बोर्ड ने आदेश जारी कर दिए, लेकिन राज्य सरकार ने रोक लगा दी है। मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस ने सभी निगम -मंडलों को ऐसे आदेश निकालने के पहले राज्य शासन से मंजूरी लेना जरूरी कर दिया है।
इसकी मंजूरी वित्त विभाग से भी लेना पड़ेगी। अब सवाल यह खड़ा हो गया है कि मंडी बोर्ड में 25 लाख के मुआवजे वाली घोषणा क्या पूरी हो सकेगी। मंडी बोर्ड में 6500 से ज्यादा अफसर-कर्मचारी पूरे प्रदेश में कार्यरत है। कोरोना की दूसरी लहर में 42 अफसर-कर्मचारी की मौत हो चुकी है।
सीएस ने लिखा- राज्य शासन से मंजूरी लेना जरूरी
मंडी बोर्ड के आदेश से पहले वेयर हाउसिंग एंड लॉजिस्टिक कॉर्पोरेशन ने भी मुआवजे का आदेश निकाला था। बाद में मंडी बोर्ड के भी अलग आदेश निकालने पर मुख्य सचिव ने सभी निगम-मंडल को किसी भी प्रावधान से पहले राज्य शासन की मंजूरी लेना अनिवार्य कर दिया है। वित्त विभाग से मंजूरी भी लेना होगी। अपर मुख्य सचिव अजीत केसरी ने इस चिट्ठी को टीप के साथ मंडी बोर्ड को भेजा है। इसके बाद से मंडी बोर्ड एमडी ने मुआवजे की प्रक्रिया को होल्ड कर दिया है।
कोराेना मृतक कर्मचारियों के आवेदन और दस्तावेज आए
मंत्री की घोषणा के बाद एमडी प्रियंका दास ने 28 अप्रैल को आदेश जारी कर दिए। इसमें मंडी बोर्ड के अफसर-कर्मचारी को क्षतिपूर्ति के रूप में एकमुश्त 25 लाख देने का प्रावधान किया गया है। यह मुआवजा 1 अप्रैल से 31 जुलाई 2021 के बीच मृत्यु होने पर मिलेगा। मुआवजे के लिए मृतक कर्मचारियों के आवेदन और दस्तावेज भेजे गए है।
शासन से अलग से मंजूरी लेने की जरूरत नहीं
मंडी बोर्ड से राज्य शासन को अलग से मंजूरी लेने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह निगम- मंडल में नहीं आता है। इसे लेकर गफलत की स्थिति को सुधार लेंगे।

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