भोपाल राजधानी से 15 किलोमीटर दूर कोलार रोड किनारे स्थित गांव कांकड़िया के रहने वाले 45 घनश्याम धुर्वे को अप्रैल में वैक्सीन का पहला डोज लगा था। घनश्याम अब पशोपेश में हैं कि दूसरा डोज लगवाएं या नहीं। बार-बार पूछने पर उन्होंने संकोच करते हुए कहा कि पड़ोस के गोल गांव में तीन लोगों की वैक्सीन लगवाने के बाद मौत हो गई।
यह मैंने कई लोगों से सुना है, अब समझ नहीं आ रहा कि टीके का दूसरा डोज लगवाऊं या नहीं? घनश्याम की कही बात की हकीकत जानने जब भास्कर संवाददाता करीब 9 किलो मीटर आगे स्थित गोल गांव पहुंचा। यहां अनोखीलाल मीरोठा मिले, उन्होंने बताया कि गांव में कई लोगों ने कोरोना का टीका लगवाया है। टीके से किसी की मौत नहीं हुई है, यह कोरी अफवाह है।
इस तरह की अफवाह शहर से लगे लगभग सभी ग्रामीण इलाकों में चल रही है। अफवाहों से फैली दहशत का आलम यह है कि लोग कोरोना का टीका ही नहीं लगवा रहे हैं। जब दैनिक भास्कर ने इन अफवाहों की हकीकत जानी तो बेहद चौकाने वाले तथ्य सामने आए। लोग एक-दूसरे से सुनी हुई बातों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाल रहे हैं कि कोरोना टीका लगवाने से उन्हें मौत या दूसरे तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। अफवाहों के इसी जाल के कारण कई लोग टीका लगवाने से बच रहे हैं। जबकि, हकीकत यह है कि कोरोना टीका लगवाने से अब तक किसी भी ग्रामीण की मौत होने की पुष्टि नहीं हुई है।
गोल गांव; ठीकरी गांव में हुई मौत, इसलिए नहीं लगवाया
गोल गांव निवासी छोटीबाई मीरोठा ने बताया कि गांव ठीकरी में हाल ही में दरोही समाज के कुछ लोगों ने कोरोना टीका लगवाया। इसके बाद कुछ दिन तक उन लोगों को बुखार आया। इलाज कराया फिर भी ठीक नहीं हुए। इनमें से दो-तीन लोगों की मौत हो गई। इसलिए मैंने अब तक टीका नहीं लगवाया।
सोंभापुर; बेटी ने फोन कर कहा- दूसरा डोज मत लगवाना
यहां के 50 वर्षीय मगलनलाल परमार का कहना है कि मैंने अप्रैल में टीके का पहला डोज लगवाया था। बुखार आया फिर ठीक हो गया। लेकिन तभी दोंता गांव देवास से मेरी बेटी ने फोन पर बताया कि उसके गांव में टीका लगने से कुछ लोगों की मौत हुई है। ऐसे में दूसरा डोज नहीं लगवाया है।
कजलीखेड़ा; मैंने टीका लगवाया, पर माता-पिता तैयार नहीं
यहां के राजेंद्र मोहरे ने बताया कि मैं बिजली कंपनी में नौकरी करता हूं। विभाग की ओर से 24 मई को शाहपुरा में टीका लगाने के लिए कैंप लगवाया था मैंने वहीं टीका लगवा लिया। मेरे पापा की उम्र 55 साल और मम्मी की उम्र करीब 50 साल है। वे टीका लगवाने को तैयार नहीं है।
ऐसी-ऐसी अफवाहें; टीके के बाद महिलाओं की तुलना में पुरुषों की ज्यादा मौत
अफवाह- कोरोना टीका लगवाने के दो-चार दिन में ही लोगों की मौत हो जाती है।
हकीकत - वैक्सीन पूरी तरह से सुरक्षित है, प्रदेश में एक करोड़ 36 लाख लोगों को टीके लगे हैं, अभी तक एक भी व्यक्ति की मौत टीका लगने से नहीं हुई है।
अफवाह- टीका लगवाने से महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों की मौत ज्यादा हो रही है।
हकीकत- टीका महिलाओं के साथ-साथ पुरुषों के लिए भी पूरी तरह सुरक्षित है।
अफवाह- जो लोग कोरोना का टीका लगवाते हैं उन्हें 2-3 हफ्ते बुखार आ रहा है।
हकीकत - गांवों में वायरस के साथ-साथ सामान्य फ्लू भी चल रहा है। टीका लगवाने के बाद एक-दो दिन ही बुखार आता है।
अफवाह- टीका लगवाने वालों को पैरालिसिस (लकवा) अटैक बहुत हो रहे हैं।
हकीकत - अब तक ऐसा कोई केस नहीं आया है कि टीका लगवाने के बाद लकवा हुआ हो।
अफवाह- टीके से शारीरिक दुर्बलता इतनी होती है कि महीनेभर काम नहीं कर पाते।
हकीकत -टीका लगने से ऐसी कोई परेशानी नहीं होती है। ऐसे लक्षण कोरोना केस में जरूर थकान और दुर्बलता के लक्षण सामने आए हैं।
गांवों में 18+ वालों में सिर्फ 18% ने लगवाई वैक्सीन
भोपाल जिले में अब तक करीब 11.50 लाख लोगों को वैक्सीन लग चुकी है। इसमें से शहरी क्षेत्र के भीतर 18+ कैटेगरी वाले 5.17 लाख व 45+ में 4.60 लाख लोगों को फर्स्ट डोज लग चुका है, यानी शहरी क्षेत्र में 18+ कैटेगरी में 49% वैक्सीनेशन हो चुका है। हालांकि गांवों की बात करें तो यहां 3.23 लाख आबादी को वैक्सीन लगाने का टारगेट रखा है। इसमें से 18+ के 2 लाख लागों में से अब तक सिर्फ 45 हजार को ही फर्स्ट डोज लगाया गया है, यानी सिर्फ 18%। वहीं 45+ कैटेगरी में कुल 1.23 लाख आबादी में से 80 हजार यानी 64% आबादी को फर्स्ट डोज लग चुका है।

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