इंदौर बच्चों व बुजुर्गों को सबसे ज्यादा निमोनिया होता है। यह मौत की पांचवीं सबसे बड़ी वजह है। वायु प्रदूषण की वजह से निमोनिया के केस 10 प्रतिशत तक बढ़ जाते हैं। नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत सभी राज्यों के कुछ शहरों को शामिल किया है। इनमें इंदौर ऐसा शहर है, जहां इसे लेकर जागरूकता लाना जरूरी है।
एयर क्वालिटी लाइफ इंडेक्स की रिसर्च के मुताबिक यदि डब्ल्यूएचओ के मापदंडों का पालन किया जाए तो शहर में एक व्यक्ति की औसत आयु 4.9 वर्ष तक बढ़ सकती है। यह बात शुक्रवार को एमजीएम मेडिकल कॉलेज के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग द्वारा वर्ल्ड निमोनिया डे के अवसर पर वक्ताओं ने कही।
कोविड-19 हो या फिर स्वाइन फ्लू, यह निमोनिया ही था : डॉ. भार्गव
एमजीएम मेडिकल कॉलेज के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग प्रमुख डॉ. सलिल भार्गव ने बताया कोविड-19 हो या स्वाइन फ्लू, यह निमोनिया ही था। वायरस, फंगस, बैक्टीरिया किसी भी कारण से यह हो सकता है। बच्चे और बुजुर्ग के लिए यह जानलेवा हो सकता है। बीड़ी, सिगरेट, अगरबत्ती का धुआं, चूल्हे का धुआं, परफ्यूम, इनसेक्टीसाइड आदि घर के अंदर के प्रदूषण हैं।
भारतीय की उम्र 6.3 साल कम हुई स्वास्थ्य के लिए स्वच्छ हवा जरूरी
इंटर-गवर्मेंटल पैनल ऑफ क्लाइमेट चैंज और डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट भी इस बात पर जोर देती है कि अच्छे स्वास्थ्य के लिए स्वच्छ हवा जरूरी है। भारत विश्व के सबसे प्रदूषित देशों में से एक है। एयर क्वालिटी लाइफ इंडेक्स की रिपोर्ट कहती है कि प्रदूषण के कारण एक भारतीय की औसत 6.3 वर्ष आयु कम हुई है। पूरे विश्व में 95 प्रतिशत लोग प्रदूषित हवा ले रहे हैं।
लक्षण : तेज बुखार, खांसी के साथ बलगम, सांस चलना, सीने में दर्द के साथ ही अन्य बीमारियां जुड़ना आदि।
उपाय : इलाज और बचाव ही इसका एकमात्र उपचार है। एंटीबायोटिक, बीमारी गंभीर होने पर वेंटिलेटर।
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