ग्वालियर कमलाराजा चिकित्सालय के पीडियाट्रिक आईसीयू में मंगलवार को इलाज के दौरान एक बच्चे की मौत हो गई। यह बच्चा डेंगू से पीड़ित था और गंभीर हालत में दोपहर को लाया गया था। बच्चे की मौत के बाद परिजन हंगामा करते हुए ड्यूटी पर तैनात जूनियर डॉक्टर से झगड़ने लगे। मामला बिगड़ते देख डॉक्टरों ने पुलिस व गार्डों को बुलवा लिया। पुलिस के आने के बाद परिजन शांत हुए।
लक्ष्मीगंज के नवल सिंह के बच्चे ऋषि को डेंगू हो गया था। उसे परिजन ने मंगलवार दोपहर 12:30 बजे गंभीर हालत में कमलाराजा अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां उसे पीडियाट्रिक आईसीयू में भर्ती किया गया। यहां दोपहर 3 बजे उसकी मौत हो गई। इसके बाद परिजन ने हंगामा कर दिया।
ड्यूटी पर तैनात जूनियर डॉक्टर ने उन्हें समझाने का प्रयास किया कि उन्होंने बच्चे को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए थे, लेकिन वह बच्चे को गंभीर हालत में लेकर आए थे। यह सुनकर परिजन जूनियर डॉक्टर से झगड़ने लगे। वहां गार्ड भी पहुंच गए और उन्होंने कंपू थाने फोन करके पुलिस को बुलवा लिया। पुलिस आने के बाद परिजन शांत हुए और अपने बर्ताव के लिए क्षमा मांगी। इसके बाद वे शव लेकर चले गए।
न्यूरोलॉजी में बनी विवाद की स्थिति
न्यूरोलॉजी में एक मरीज काे दिखाने आए परिजन अपने मरीज को जल्द देखने के लिए जूनियर डॉक्टरों से झगड़ गए। डॉक्टर का कहना था कि गंभीर मरीज देख रहे हैं इसके बाद उनका मरीज देखेंगे। यह सुनकर परिजन ने फोन डॉक्टर की तरफ बढ़ाते हुए कहा कि नेताजी से बात कर लो। डॉक्टर ने फोन पर बात करने से मना कर दिया। इसे लेकर परिजन और जूनियर डॉक्टरों में नौबत हाथापाई तक पहुंच गई। इसके बाद ये लोग डॉक्टर को धमकी देकर चले गए।
भीड़ को किया जाए नियंत्रित
जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. श्रीकांत शर्मा का कहना है कि इन दिनों वार्डों में क्षमता से तीन गुना अधिक मरीज भर्ती हैं। इन मरीजों के साथ 4-6 परिजन तक आते हैं। इसके कारण जहां मरीजों को इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ता है वहीं मरीजों का इलाज करने में परेशानी आती है। इसी कारण कई बार विवाद की स्थिति बनती है। इससे अस्पताल की छवि धूमिल होती है। जूनियर डॉक्टर पुन: डीन को इस संबंध में ज्ञापन सौंपेगा।
डॉक्टर आपके अपनाें का जीवन बचाने में लगे उन पर भरोसा रखें
एचआईएमएस सिस्टम के साथ नई पास व्यवस्था जल्द शुरू की जाएगी जिसमें परिजन का स्कैन करके फोटाे लगाया जाएगा। नए साल से संभवत: व्यवस्था शुरू हो जाएगी। लोगों को भी यह समझना चाहिए कि डॉक्टर आपके अपनों का जीवन बचाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं इसलिए उन पर भरोसा रखें। -डॉ. आरकेएस धाकड़, अधीक्षक,जेएएच
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