शिवपुरी। जब सिस्टम अंधा हो जाए और प्रशासन कान में तेल डालकर सो जाए, तो जनता को खुद ही 'जज' और 'जल्लाद' बनना पड़ता है। कुछ ऐसा ही खौफनाक और हैरान कर देने वाला नजारा शिवपुरी जिले के खनियाधाना थाना क्षेत्र के कफ़ार गांव में देखने को मिला। यहाँ बरसों से चल रहे अवैध कच्ची शराब के काले कारोबार पर जब पुलिस और आबकारी विभाग ने आँखें मूंद लीं, तो आदिवासी महिलाओं का सब्र का बांध टूट गया। हाथों में लाठियां लेकर निकलीं महिलाओं की फौज ने अवैध शराब के ठिकानों पर वो तांडव मचाया कि शराब माफिया दुम दबाकर भाग खड़े हुए।
सड़क पर बहा दी शराब, लाठियों से तोड़े ड्रम
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो गवाही दे रहे हैं कि जब महिलाएं ठिकानों पर पहुँचीं, तो उनका गुस्सा सातवें आसमान पर था। महिलाओं ने लाठियां बरसाकर शराब बनाने वाले बर्तनों और उपकरणों को चकनाचूर कर दिया। कई लीटर महुआ और तैयार कच्ची शराब को नालियों और सड़कों पर बहा दिया गया। महिलाओं का साफ़ कहना है कि इस ज़हरीली शराब ने उनके घरों को बर्बाद कर दिया है, पुरुष दिन-रात नशे में धुत रहते हैं, जिससे घरेलू हिंसा और आर्थिक तंगी चरम पर पहुँच चुकी है। अब इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
चेतावनी: दोबारा भट्टी सुलगी, तो अंजाम भुगतने को तैयार रहे माफिया
गंभीर आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने कहा कि वे आबकारी विभाग और स्थानीय पुलिस के चक्कर काट-काटकर थक चुके थे, लेकिन साहबों की 'सहानुभूति' शायद शराब माफियाओं के साथ थी। जब कोई कार्यवाही नहीं हुई, तो महिलाओं को खुद मोर्चा संभालना पड़ा। महिलाओं ने दोटूक चेतावनी दी है कि अगर दोबारा गांव में भट्टी सुलगी, तो इससे भी भयानक अंजाम होगा।
संपादकीय टिप्पणी: हमारी ख़बरों का असर नहीं, तो अब लाठियों का असर देखिए हुजूर!
हम फिर कह रहे हैं... जागिए प्रशासन! इस अवैध शराब के धंधे को लेकर 'हम पूर्व में भी कई बार प्रमुखता से ख़बरें चला चुके हैं।' लेकिन शासन प्रशासन कोई असर नहीं
हमने कई वार अबेध शराब को लेकर खबरों का प्रकाशन किया लेकिन जिम्मेदार कुंभकर्णी नींद में सोए रहे और हमारी ख़बरों को अनदेखा कर , दबा दिया गया।
आज जो कुछ भी कफ़ार गांव में हुआ, वह आबकारी विभाग और पुलिस के मुंह पर एक करारा तमाचा है। यह साबित करता है कि जनता का अब खाकी पर से भरोसा उठ चुका है। अगर हमारी ख़बरों पर वक़्त रहते कार्यवाही हो जाती, तो कानून व्यवस्था को इस तरह महिलाओं को अपने हाथ में न लेना पड़ता। अब देखना यह है कि इस 'लाठीमार' आंदोलन के बाद भी साहबों की नींद टूटती है या वे अब भी माफियाओं को संरक्षण देते रहेंगे!

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