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आतंकवाद पर निर्णायक प्रहार: मोदी सरकार का 'जीरो टॉलरेंस' मॉडल ही भारत की नई सुरक्षा गारंटी


भोपाल। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर भारतीय सुरक्षा एजेंसियों द्वारा 14 राज्यों में चलाए गए एक व्यापक और समन्वित अभियान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नया भारत अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) समर्थित 'शहज़ाद भट्टी नेटवर्क' का पूरी तरह सफाया और 200 से अधिक संदिग्धों की गिरफ्तारी देश की आंतरिक सुरक्षा के इतिहास में एक मील का पत्थर है। यह सफलता केवल एक सैन्य या खुफिया उपलब्धि नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश द्वारा अपनाई गई 'जीरो टॉलरेंस' (जीरो-टॉलरेंस) नीति का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

14 राज्यों में एक साथ प्रहार: सुरक्षा तंत्र का अभूतपूर्व समन्वय

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, सुरक्षा बलों ने बेहद योजनाबद्ध तरीके से 14 राज्यों में एक साथ छापेमारी कर इस खतरनाक तंत्र की रीढ़ तोड़ दी। आतंकी गुट के कब्जे से आईईडी (IED), पाकिस्तान ऑर्डनेंस फैक्ट्री की मुहर लगे हैंड ग्रेनेड, अत्याधुनिक पिस्तौलें, जिंदा कारतूस और जासूसी उपकरण बरामद होना इस बात का प्रमाण है कि यह नेटवर्क देश को दहलाने की किसी बड़ी और गहरी साजिश पर काम कर रहा था। समय रहते इस नेटवर्क को ध्वस्त कर सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़ी संभावित त्रासदी को टाल दिया है।

नक्सलवाद से लेकर सीमापार आतंकवाद तक: सुरक्षा पर सीएम डॉ. मोहन यादव का रुख

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस ऐतिहासिक सफलता की सराहना करते हुए सोशल मीडिया 'एक्स' पर लिखा कि नक्सलवाद पर मिली ऐतिहासिक सफलताओं के बाद, देश की सुरक्षा को चुनौती देने वाले हर भारत-विरोधी तत्व के खिलाफ यह निर्णायक प्रहार जारी रहेगा। उनका यह वक्तव्य इस बात को रेखांकित करता है कि चाहे वो सीमापार से संचालित आतंकवाद हो या देश के भीतर फैला नक्सलवाद—भारत अब रक्षात्मक होने के बजाय आक्रामक और निवारक (Preventive) सुरक्षा रणनीति पर काम कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण: अब वित्तीय और वैचारिक नेटवर्क को भी जड़ से उखाड़ना जरूरी

इस बात में कोई दो राय नहीं है कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की प्रतिक्रिया में अभूतपूर्व बदलाव आया है। पहले जहां आतंकी घटनाओं के बाद केवल बयानों और जांच तक सीमित रहने का दौर था, वहीं अब खतरों को उनके सिर उठाने से पहले ही खत्म किया जा रहा है।

हालांकि, 200 से अधिक गिरफ्तारियां यह भी दर्शाती हैं कि देश के भीतर स्थानीय स्तर पर आईएसआई के स्लीपर सेल्स और मददगारों की मौजूदगी एक गंभीर चुनौती बनी हुई है। महज हथियारों की जब्ती और गिरफ्तारियां ही अंतिम पड़ाव नहीं हो सकतीं। जब तक आतंकवाद को मिलने वाली वित्तीय मदद (Terror Funding), नशीले पदार्थों की तस्करी का जाल (Narco-Terrorism) और इंटरनेट के जरिए फैलाए जा रहे रेडिकलाइजेशन को जड़ से खत्म नहीं किया जाता, तब तक यह लड़ाई अधूरी रहेगी।

सुरक्षा बलों का यह ऑपरेशन निसंदेह साधुवाद के योग्य है, जिसने देशवासियों को यह विश्वास दिलाया है कि भारत की सीमाएं और आंतरिक क्षेत्र अब मजबूत और दूरदर्शी हाथों में पूरी तरह सुरक्षित हैं।

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