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कर्मचारियों की पदोन्नति में रोड़ा नहीं बनेगी CPCT परीक्षा, मध्यप्रदेश में ‘एनालॉग पनीर’ पर लगेगा प्रतिबंध: CM डॉ. मोहन यादव


भोपाल: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों और जनस्वास्थ्य से जुड़े दो अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि कंप्यूटर दक्षता प्रमाणीकरण परीक्षा (CPCT) कर्मचारियों की पदोन्नति में किसी भी तरह की बाधा नहीं बनेगी। इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश में मिलावटी/कृत्रिम 'एनालॉग पनीर' की बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के निर्देश जारी किए हैं।

पदोन्नति की अनिवार्यता से मिलेगी राहत, कोई कर्मचारी नहीं होगा रिवर्ट मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पदोन्नति में CPCT परीक्षा की अनिवार्यता को लेकर जल्द ही सकारात्मक निर्णय लिया जाए। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी पात्र कर्मचारियों को समय पर पदोन्नति का लाभ मिले और CPCT परीक्षा उत्तीर्ण न होने के कारण कोई भी कर्मचारी पदोन्नति से वंचित न रहे और न ही किसी को रिवर्ट किया जाए।

‘एनालॉग पनीर’ पर प्रतिबंध, प्राकृतिक दुग्ध उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने अन्य राज्यों की तर्ज पर मध्यप्रदेश में भी ‘एनालॉग पनीर’ (वनस्पति तेलों और रसायनों से बनने वाला कृत्रिम पनीर) के निर्माण और बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा, "हम प्रदेश में प्राकृतिक रूप से दुग्ध उत्पादन को बढ़ाएंगे और विशुद्ध रूप से प्राकृतिक पनीर के निर्माण को ही प्रोत्साहन देंगे।"

सरकार के इन फैसलों से जहाँ एक ओर लाखों कर्मचारियों को पदोन्नति का मार्ग सुगम होने की उम्मीद जगी है, वहीं दूसरी ओर आम जनता को मिलावटी खाद्य पदार्थों से निजात मिलने का रास्ता साफ हुआ है।

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