शिवपुरी। झांसी तिराहा स्थित विवादित गांधी पेट्रोल पंप पर सोमवार को उस वक्त भारी ड्रामा देखने को मिला, जब नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा खुद जेसीबी और डंपर लेकर कार्रवाई करने पहुँच गईं। लेकिन भारी पुलिस बल और पर्याप्त नपा अमले की गैरमौजूदगी के चलते कार्रवाई पूरी तरह ठप हो गई। पेट्रोल पंप के कर्मचारी जेसीबी के आगे लेट गए और नगर पालिका की टीम को उल्टे पांव वापस लौटना पड़ा। हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद हुई इस 'अधूरी कार्रवाई' ने नगर पालिका प्रशासन और सीएमओ की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पिछली आशंका सच साबित, नगर पालिका की हुई भारी 'थू-थू'
Anti-Corruption News ने एक दिन पहले ही अपनी खबर में इस बात की आशंका जता दी थी कि यदि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद बुलडोजर नहीं चला, तो नगर पालिका प्रशासन की सरेआम 'थू-थू' होना तय है। सोमवार को ठीक वैसा ही नजारा देखने को मिला। बिना किसी पूर्व पुख्ता तैयारी और बिना पर्याप्त सुरक्षा बल के कार्रवाई का ढोंग करने पहुँची नपा अध्यक्ष को खाली हाथ लौटना पड़ा, जिससे पूरे शहर में नगर पालिका की साख पर बट्टा लग गया है।
सूत्रों का दावा: प्रशासनिक स्तर पर चल रही थी तगड़ी साठ-गांठ
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरी कार्रवाई को ऐन मौके पर फ्लॉप कराने के पीछे प्रशासनिक स्तर पर भीतर ही भीतर तगड़ी 'साठ-गांठ' का खेल चल रहा था। एक तरफ नपा अध्यक्ष कार्रवाई का ढिंढोरा पीट रही थीं, तो दूसरी तरफ प्रशासनिक गलियारों में रसूखदारों को बचाने के लिए बिसात बिछाई जा चुकी थी। यही वजह रही कि मौके पर न तो पुलिस बल तैनात किया गया और न ही नगर पालिका का मुख्य अमला वहाँ पहुँचा।
JCB के आगे लेटे कर्मचारी, 2 घंटे तक मची गहमागहमी
नगर पालिका की टीम ने जैसे ही पेट्रोल पंप के सामने रास्ते की खुदाई शुरू करने का प्रयास किया, वैसे ही वहां मौजूद कर्मचारी जेसीबी के आगे आकर लेट गए। कर्मचारियों के इस आक्रामक विरोध के बाद मौके पर तनाव की स्थिति बन गई। नपा टीम और कर्मचारियों के बीच करीब दो घंटे तक तीखी बहस और गहमागहमी चलती रही, लेकिन पर्याप्त पुलिस बल न होने के कारण नपा अमला पूरी तरह असहाय नजर आया।
सीएमओ नदारद, लेटर बम से उधड़ी गुटबाजी की परतें
हैरानी की बात यह रही कि इतनी बड़ी कार्रवाई के दौरान सीएमओ यशवंत राठौड़ मौके से पूरी तरह नदारद रहे। कार्रवाई से एक दिन पहले सीएमओ द्वारा एसपी को पुलिस बल के लिए भेजा गया पत्र भी सार्वजनिक हो चुका था। हालांकि, बाद में सीएमओ के उस बयान ने प्रशासनिक गुटबाजी की पोल खोल दी, जिसमें उन्होंने कहा कि पुलिस बल मांगने का पत्र नपा अध्यक्ष के 'दबाव' में भेजा गया था।
अध्यक्ष गायत्री शर्मा का छलका दर्द: "गरीबों पर बुलडोजर, रसूखदारों पर नरमी"
मौके पर बेबस दिखीं नपा अध्यक्ष गायत्री शर्मा ने खुलकर अपनी ही प्रशासनिक मशीनरी पर भड़ास निकाली। उन्होंने आरोप लगाया कि जब हाईकोर्ट का फैसला नगर पालिका के पक्ष में आ चुका है और नोटिस भी दिया जा चुका है, तब भी अफसर सहयोग करने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा, "छोटे और गरीब अतिक्रमणकारियों पर तो प्रशासन तुरंत बुलडोजर चला देता है, लेकिन जब बात बड़े और रसूखदार लोगों की आती है, तो प्रशासनिक अमला पीछे हट जाता है।"
1960 की लीज और अब सुप्रीम कोर्ट पर टिकीं निगाहें
नगर पालिका रिकॉर्ड के अनुसार, झांसी तिराहा स्थित यह कीमती जमीन वर्ष 1960 में मैसर्स जय भारत ऑटोमोबाइल्स को 25 साल की लीज पर दी गई थी। लीज अवधि समाप्त होने के दशकों बाद भी जमीन खाली न होने पर यह कानूनी विवाद चल रहा है। दूसरी ओर, पेट्रोल पंप संचालक समीर गांधी का कहना है कि मामला अब सुप्रीम कोर्ट में पहुँच चुका है और 6 अक्टूबर (आज) को इसमें सुनवाई होनी है।
अब देखना यह होगा कि क्या आज सुप्रीम कोर्ट से नगर पालिका को राहत मिलती है या फिर प्रशासनिक साठ-गांठ और ढुलमुल रवैये के चलते यह कीमती जमीन रसूख के साये में ही दबी रह जाएगी।

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