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मौसमी बीमारियों के उपचार और बचाव के बेहतर इंतजाम रखें अस्पतालों में

 संचालक स्वास्थ्य सेवाएँ डॉ. बी.एन. चौहान ने प्रदेश के सभी शासकीय अस्पतालों को मौसमी बीमारियों जैसे जल-जनित रोग, उल्टी-दस्त, आंत्रशोथ, फुड पाइजनिंग, वाहक जनित रोग, मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया आदि के उपचार और रोकथाम के बेहतर इंतजाम रखने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने बताया कि जिला-स्तर पर रेपिड रिस्पांस टीम गठित की गई हैं। जल-जनित रोगों की रोकथाम के लिये शुद्ध पेयजल के उपयोग और ग्राम में ओआरएस डिपो होल्डर की स्थापना की गई है। मच्छर से होने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिये मच्छर निरोधक गतिविधियाँ की जा रही हैं।
        संचालक डॉ. चौहान ने बताया कि मस्तिष्क ज्वर, दिमागी बुखार (एक्यूट इंसेफ डिसीज सिण्ड्रोम) किसी भी उम्र में होने वाली बीमारी है। यह बीमारी कई कारणों से हो सकती है, जिसमें वायरस, वेक्टीरिया, परजीवी, हाइपोग्लाइसीमिया, टॉक्सिस आदि प्रमुख हैं। मस्तिष्क ज्वर होने पर रोगी को तेज बुखार, सिर दर्द, उल्टियाँ, झटके आना, मानसिक विचलन और बेहोशी जैसे प्रमुख लक्षण होते हैं। 

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