इंदौर इस साल दीपावली के मौके पर शहर के बाशिंदों ने दिखा दिया कि वे न केवल साफ-सफाई को अहमियत देते हैं बल्कि वायु और ध्वनि प्रदूषण को लेकर भी सजग हैं, ताकि पर्यावरण स्वच्छ रहे। इसकी मिसाल यह है कि प्रकाश और उल्लास के इस त्योहार के मौके पर इंदौर में तकरीबन 50 प्रतिशत कम पटाखों की बिक्री हुई।
पटाखा कारोबारियों ने बताया कि इस साल दीपावली पर कम बिक्री हुई। कोविड-19 महामारी के प्रकोप के बीच लोगों ने पटाखों में कम दिलचस्पी दिखाई। इसके कारण दुकानदारों की तरफ से पटाखों की मांग कम रही, जिसका असर इसकी मैन्यूफैक्चरिंग पर हुआ। चूंकि पटाखा बनाने वाली कंपनियां कम कर्मचारियों के साथ काम कर रही हैं, लिहाजा आपूर्ति भी तंग रही।
इंदौर होलसेल फायरवर्क्स डीलर्स एसोसिएशन के मुताबिक आम तौर पर पटाखों का कारोबार दीपावली में चरम पर पहुंच जाता है। इसके बाद शादियों का सीजन शुरू होने की वजह से फरवरी तक पटाखों की अच्छी बिक्री होती है। इसकी बदौलत शहर में पटाखों का कुल कारोबार सालाना 50 करोड़ रुपये के आसपास पहुंच जाता है, लेकिन इस साल दीपावली के मौके पर काफी कम बिक्री हुई। एसोसिएशन के प्रेसिडेंट कैलाश बालचंदानी ने कहा, इस साल पटाखों की मांग में 50 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट आई। लोगों में इसके प्रति कम उत्साह को देखते हुए हमने स्टॉक कम रखा था। इसके अलावा इसकी मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों की तरफ से आपूर्ति भी कमजोर रही।
उत्पादन भी कम
रीजनल पार्क के सामने इस साल पटाखों की करीब 50 दुकानें लगाई गईं और लगभग इतनी ही दुकानें विजय नगर स्थित मेघदूत उपवन के पास थीं। इसके लिए बकायदा जिला प्रशासन से अनुमति ली गई थी। इंदौर होलसेल फायरवर्क्स डीलर्स एसोसिएशन के ज्वाइंट सेक्रेटरी संजय चौधरी ने कहा कि पटाखों का कम उत्पादन हो रहा है, क्योंकि कारखानें कम कर्मचारियों के साथ चल रहे हैं। इसके अलावा मांग को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। महामारी के डर से लोग ऐसी गैर-जरूरी चीजें खरीदने के लिए कम निकल रहे हैं। इसके कारण कुल कारोबार पिछले साल के मुकाबले करीब आधा रह गया।
पर्यावरण को लेकर बढ़ी जागरूकता
एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज मध्य प्रदेश के चेयरमैन प्रमोद दफरिया ने कहा कि शहर में पटाखों की मांग घटने की सबसे बड़ी वजह लोगों के बीच पर्यावरण को लेकर जागरूकता बढ़ना है। असल में इस साल मांग ही कम रही, जिहाजा उत्पादन भी कम हुआ। शादियों के सीजन में भी ऐसे ही हालात देखने को मिलेंगे।
हवा खराब होने का अंदेशा
पर्यावरणविदों ने चेताया है कि पटाखों की वजह से नवंबर में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 150 से ऊपर निकल जाएगा। यह खतरनाक स्थिति होगी, क्योंकि यक्यूआई जब 0-50 के बीच रहता है तो हवा शुद्ध मानी जाती है। यह सूचकांक 100 से ऊपर निकलने पर हवा की गुणवत्ता खराब हो जाती है, जो सांस लेने के लिए अच्छा नहीं होता।
पटाखों में खतरनाक रसायन
पटाखों में सल्फर, मैग्नेशियम, फॉसफोरस, कॉपर, एल्यूमीनियम और जिंक जैसे मेटल शॉल्ट्स और मेटल ऑक्साइड्स होते हैं। इसमें लेड और क्रोमियम भी मिलाए जाते हैं, जो जलने के बाद रंग बिखेरते हैं और हवा को दूषित करते हैं। ग्रीन पटाखों में ऐसे केमिकल्स कम होते हैं।

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