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जयभान सिंह पवैया का कद बढ़ाकर ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ संतुलन की कोशिश



भोपाल। कांग्रेस छोड़कर आए राज्यसभा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया और भाजपा के नेताओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिशें भारतीय जनता पार्टी ने शुरू कर दी हैं। महल विरोधी यानी सिंधिया परिवार के विरोधी नेता कहे जाने वाले जयभान सिंह पवैया का कद बढ़ाकर महाराष्ट्र राज्य का सह प्रभारी बनाया जाना भी संतुलन की राजनीति का ही एक हिस्सा है। मध्य प्रदेश की 28 सीटों के उपचुनाव के बीच भी पवैया और सिंधिया के बीच दशकों से जमी बर्फ पिघली नहीं थी।

पवैया ने उपचुनाव में प्रचार की औपचारिकता तो दिखाई, लेकिन सिंधिया घराने को लेकर उनकी तल्खी में कमी नहीं आई थी। पार्टी में पवैया के महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए भाजपा ने एक तीर से दो निशाने साधे हैं। पहला, पवैया को महाराष्ट्र में व्यस्त कर दिया ताकि वे ग्वालियर-चंबल की राजनीति से बाहर रहें। दूसरा, पवैया को अन्य जगह व्यस्त करने से ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे प्रभावशाली नेता को स्थापित करने में भाजपा को आसानी होगी।

दरअसल, पवैया और सिंधिया विपरीत ध्रुव माने जाते हैं। मध्य प्रदेश में सत्ता का भविष्य तय करने वाले 28 विधानसभा क्षेत्रों के उपचुनाव हुए तो पार्टी ने पवैया को समझाने के लिए शीर्ष नेतृत्व को लगाया। राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष को भोपाल भेजा गया तो उन्होंने पवैया को बुलाकर अलग से बातचीत की।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ग्वालियर गए तो उन्होंने आधा घंटे तक पवैया से चर्चा की। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह भय्या जी जोशी भोपाल आए तो उनसे भी पवैया की बातचीत हुई थी। पर उपचुनाव के परिणाम आए तो भाजपा को ग्वालियर-चंबल में अनुकूल सफलता नहीं मिली।

पार्टी के मंथन में माना गया कि पवैया सक्रिय तो हुए पर उनकी टीम का पूरी तरह सक्रिय ना होना भाजपा के लिए निराशाजनक रहा। यही वजह है कि भाजपा ने ज्योतिरादित्य सिंधिया की सियासत का रास्ता साफ करने के लिए पवैया का कांटा भी निकाल दिया और उनका सम्मान भी बरकरार रखा। पवैया अब महाराष्ट्र में व्यस्त रहेंगे और राष्ट्रीय राजनीति में शामिल होंगे तो स्थानीय राजनीति में सिंधिया का मार्ग प्रशस्त होगा।

झा का भी हो सकता है पुनर्वास

ग्वालियर-चंबल अंचल में सिंधिया के विरोधी रहे प्रभात झा का भी भाजपा जल्दी ही पुनर्वास कर सकती है। राज्यसभा सदस्य रहे झा भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी रहे हैं। उन्होंने ग्वालियर में रहकर उपचुनाव का मोर्चा संभाला था।

पवैया का पार्टी में महत्व

पवैया राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से भाजपा में आए हैं। श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। बजरंग दल के राष्ट्रीय संयोजक रहने के अलावा वे शिवराज सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठनों में दायित्वों का निर्वहन करने से उनके साथ कार्यकर्ताओं की बड़ी संख्या रही है। 

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