भोपाल सरकारी नौकरी में पदस्थ पत्नियों के साथ सामंजस्य बैठाने को लेकर पतियों ने कुटुंब न्यायालय की शरण ली थी। शुक्रवार को पहुंचे दो मामलों में समझौता हुआ। मामले में दोनों दंपती के बीच रिश्ता इतना बिगड़ गया कि एक-दूसरे से अलग होने की ठान ली। दोनों मामले में पत्नियां दूसरे जिले में सरकारी नौकरी में पदस्थ हैं। वहीं पति राजधानी में प्राइवेट नौकरी करते हैं। काउंसिलिंग के बाद दोनों पतियों ने सरकारी नौकरी कर रही पत्नियों से सुलह कर ली। यहां तक कि पतियों ने जिस शहर में पत्नियां रह रही हैं, वहीं जाकर नौकरी करने और घर के कामों में हाथ बटाने के लिए राजी हुए।
नौकरी छूटी तब अहमियत समझ आई
पत्नी के शहर में पति करेगा नौकरी
दूसरें मामले में पत्नी विदिशा में रहती है और शिक्षा विभाग में कार्यरत है। वहीं पति भोपाल में अपने परिवार के साथ रहता है। दोनों का एक 5 साल का बेटा है। अक्सर दोनों के बीच बच्चे की देखभाल को लेकर झगड़ा होता था और इस कारण पत्नी दो साल से मायके में रह रही थी। मामले में पति ने पत्नी को घर वापस बुलाने का केस लगाया था। काउंसिलिंग में पत्नी ने कहा कि बच्चे की जिम्मेदारी दोनों की है। ऐसे में मुझे सरकारी नौकरी छोड़ने के लिए पति व ससुराल वाले दबाव बनाते हैं। काफी मेहनत के बाद सरकारी नौकरी मिलती है। इसे छोड़ नहीं सकती। पति की प्राइवेट नौकरी है तो वे विदिशा में भी कर सकते हैं। दोनों के बीच समझौता हुआ और पति ने कहा कि वह पत्नी के यहां रहने के लिए तैयार है।
वर्जन
दोनों मामलों में नौकरी छोड़ने और घर की जिम्मेदारी ना लेने के कारण विवाद जैसी स्थिति सामने आई थी। काउंसिलिंग कर मामले को सुलझाया गया।

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