जिला प्रशासन की लापरवाही के चलते आरोपी संजय वाल्मीकि को गिरफ्तार होने के 23 दिन बाद हाई कोर्ट से फौरी राहत मिल गई। आरोपी को पुलिस ने 25 अप्रैल 2021 को गिरफ्तार किया था। जिसके बाद उसकी ओर से हाई कोर्ट में जमानत के लिए याचिका दायर की गई। जस्टिस शील नागू और जस्टिस एस ए धर्माधिकारी की डिवीजन बेंच ने कहा- जिला प्रशासन ने 22 सितंबर 2020 को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के अंतर्गत याचिकाकर्ता के खिलाफ कार्रवाई की लेकिन राज्य शासन को अनुमोदन के लिए प्रस्ताव बनाकर नहीं भेजा। ये राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के प्रावधान का उल्लंघन हैं। ऐसे में आरोपी को 50 हजार के मुचलके पर रिहा किया जाए।
दरअसल, संजय वाल्मीकि के खिलाफ कई थानों में प्रकरण दर्ज हैं। इसी के आधार पर कलेक्टर ने उसके खिलाफ 22 सितंबर 2020 को 3 माह के लिए रासुका लगाई थी। सुनवाई के दौरान शासन की ओर से पैरवी करते हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता अंकुर मोदी ने कोर्ट को बताया- चूंकि आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया था, इस कारण अधिकारियों को ऐसा प्रतीत हुआ कि रासुका लगाने का आदेश प्रभावी नहीं हुआ है। इसके चलते रासुका की कार्रवाई का प्रस्ताव बनाकर अनुमोदन के लिए राज्य शासन के पास नहीं भेजा गया था। मामले की अंतिम सुनवाई 24 मई को होगी।
दरअसल, संजय वाल्मीकि के खिलाफ कई थानों में प्रकरण दर्ज हैं। इसी के आधार पर कलेक्टर ने उसके खिलाफ 22 सितंबर 2020 को 3 माह के लिए रासुका लगाई थी। सुनवाई के दौरान शासन की ओर से पैरवी करते हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता अंकुर मोदी ने कोर्ट को बताया- चूंकि आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया था, इस कारण अधिकारियों को ऐसा प्रतीत हुआ कि रासुका लगाने का आदेश प्रभावी नहीं हुआ है। इसके चलते रासुका की कार्रवाई का प्रस्ताव बनाकर अनुमोदन के लिए राज्य शासन के पास नहीं भेजा गया था। मामले की अंतिम सुनवाई 24 मई को होगी।
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