वटवृक्ष बरगद को जल चढ़ाना केवल एक प्रथा ही नहीं बल्कि सुख शांति तरक्की का माध्यम है*
बिर्रा/जांजगीर-चांपा:-
सुहागिनें आज के दिन 16श्रृंगार करके वट सावित्री व्रत का पूजन विधि विधान से बरगद के पेड़ की पूजा कर फेरे लगाते हैं ताकि उनके पति दीर्घायु हो प्यार श्रद्धा और समर्पण का यह भाव इस देश में सच्चे और पवित्र प्रेम की कहानी कहता है।
कोरोना संक्रमण काल को देखते हुए कई महिलाओं ने घरों में पूजा अर्चना की अपने पति के दीर्घायु के लिए व्रत रख अपने घरों में वट पीपल के पौधे की परिक्रमा की पूजा किए। इस दिन महिलाएं उपवास कर पीपल वृक्ष की पूजा कर पति की दीर्घायु उनकी मनोकामना के लिए उपवास रहते हैं।
ऐसी मान्यता है कि इसी दिन देवी सावित्री ने यमराज के फंदे से अपने पति सत्यवान के प्राणों की रक्षा की थी कथा में उल्लेख है कि जब यमराज सत्यवान के प्राण लेकर जाने लगे तब सावित्री भी यमराज के पीछे पीछे चलने लगी यमराज ने सावित्री को ऐसा करने से रोकने के लिए तीन वरदान दिए। एक वरदान में सावित्री ने मांगा की वह सौ पुत्रों की माता बने यमराज ने ऐसा ही होगा कह दिया इसके बाद सावित्री ने यमराज से कहा कि मैं पतिव्रता स्त्री हूं और बिना पति के संतान कैसे संभव है सावित्री के बाद सुनकर यमराज को अपनी भूल समझ में आ गई वह गलती से सत्यवान के प्राण वापस करने का वरदान दे चुके हैं जब सावित्री पति के प्राण को यमराज के फंदे से छुड़ाने के लिए यमराज के पीछे जा रही थी उस समय वट वृक्ष ने सत्यवान के शव की देख रेख की थी पति के प्राण लेकर वापस लौटने पर सावित्री ने वट वृक्ष का आभार व्यक्त करने के लिए उसकी परिक्रमा की इसलिए वट सावित्री व्रत में वृक्ष की परिक्रमा का नियम है।
सुहागन स्त्रियां वट सावित्री व्रत के दिन सोलह श्रृंगार करके सिंदूर रोली फूल अक्षत चना आम फल और मिठाई से वट वृक्ष की पूजा कर सावित्री सत्यवान और यमराज की कथा श्रवण कर ब्राह्मण देव को दक्षिणा सामग्री दान आदि कर अपनी पति की लंबी उम्र की कामना करते हुए आशीर्वाद लेते हैं।


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