ग्वालियर कोरोना महामारी में संक्रमित हुए नगर निगम कर्मचारी ने लंग्स और किडनी में इन्फेक्शन के बाद दम तोड़ दिए। कर्मचारी के कोई बेटा नहीं था। अब संकट खड़ा हो गया कि मुखाग्नि कौन देगा। जब सभी सोच रहे थे, तभी नगर निगम कर्मचारी की बड़ी बेटी विजेता ने कदम आगे बढ़ाए। यह देखकर सभी हैरान हुए, फिर बेटी के साहस पर नाज भी हुआ। विजेता ने एक बेटे की तरह पिता के अंतिम संस्कार की सारी क्रियाएं पूरी की। पिता को मुखाग्नि देकर बेटे का फर्ज निभाया। यह घटनाक्रम है शुक्रवार शाम लक्ष्मीगंज मुक्तिधाम का।
शहर के लश्कर स्थित दानाओली निवासी 57 साल के नरेन्द्र सिंह चौहान नगर निगम में कर्मचारी थे। परिवार में पत्नी के अलावा उनके दो बेटियां विजेता(27) और अजेता(23) हैं। कोरोना की पहली लहर में नरेन्द्र कोविड पॉजिटिव आए थे। इलाज हुआ था, लेकिन वायरस ने उनके लंग्स और किड्नी पर गहरा असर डाला था। तभी से उनका उपचार चल रहा था। दो दिन पहले अचानक नरेन्द्र की हालत बिगड़ी और उन्होंने शुक्रवार सुबह दम तोड़ दिया। नगर निगम कर्मचारी की मौत के बाद अब घर और मोहल्ले में एक ही चर्चा थी कि मुखाग्नि कौन देगा। इसके लिए कोई भतीजे तो कोई भाई का नाम बता रहा था। इसी समय नगर निगम कर्मचारी की बड़ी बेटी विजेता सिंह जो खुद भी एक समाजसेवी हैं आगे आईं। विजेता ने कहा कि बेटा बेटी में कोई फर्क नहीं होता। जो काम एक बेटा कर सकता है वह बेटी क्यों नहीं कर सकती। इसके बाद सभी के सामने तय हुआ कि विजेता ही अपने पिता की सभी अंतिम क्रियाएं करेंगी। शव को लक्ष्मीगंज मुक्तिधाम ले जाया गया। जहां विजेता ने अपने पिता को मुखाग्नि देकर बता दिया कि बेटियां भी यह फर्ज निभा सकती हैं।
खुद समाजसेवा और बेटियों को आगे बढ़ाने करती हैं काम
- विजेता सिंह खुद भी समाज सेवा के क्षेत्र में आगे रहती हैं। वह लगातार बेटी बचाओ अभियान से जुड़ी रही हैं। बेटियों के खिलाफ कोई भी घटना हो तो सबसे पहले विजेता आगे खड़ी नजर आती हैं। ऐसे में उनका यह कदम उठाना कोई आश्चर्य चकित करने वाला नहीं था। सभी उनके साहस पर नाज कर रहे हैं।

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