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मेडिकल कॉलेज जीएमसी के अस्पताल में ओटी शुरू नहीं, जिला अस्पताल से ग्वालियर रैफर करना पड़ रहे मरीज



शिवपुरी शासकीय मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) के नए हॉस्पिटल में ओटी (ऑपरेशन थिएटर) शुरू नहीं किया जा रहा है। ऐसे में जिला अस्पताल से सभी तरह के गंभीर मरीजों को ग्वालियर रैफर करना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि गंभीर मरीज ग्वालियर पहुंचने से पहले ही एंबुलेंस में दम तोड़ रहे हैं। इसके बाद भी जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे।

कोरोना की दूसरी लहर के दौरान 20 अप्रैल 2021 से जीएमसी अपनी सेपरेट हॉस्पिटल बिल्डिंग में शिफ्ट हो गया। डॉक्टर व अन्य स्टाफ के साथ ओटी से संबंधित सामान भी नई बिल्डिंग में ले गए। लोगों को उम्मीद थी कि जीएमसी के डॉक्टर जिस तरह जिला अस्पताल में मरीजों ऑपरेशन कर रहे थे, उसी तरह नए अस्पताल में भी शुरू कर देंगे लेकिन पूरा जून माह बीतने के बाद जुलाई के 23 दिन बीत गए लेकिन ओटी शुरू नहीं की। जिले में मेडिकल कॉलेज खुलने से बेहतर इलाज की उम्मीद थी। कॉलेज में तीन साल पहले ही विशेषज्ञ डॉक्टर आ चुके थे और दो साल से कॉलेज का संचालन हो रहा है। अलग से मेडिकल कॉलेज की अलग हॉस्पिटल की कमी भी अप्रैल 2021 से बिल्डिंग मिलते ही पूरी हो चुकी है। इसके बाद भी गंभीर मरीज इलाज को तरस रहे हैं।

जीएमसी से लौटाया, ऑपरेशन के लिए दिव्यांग महिला से निजी हॉस्पिटल वालों ने 8 हजार रु. मांगे

ग्रामीण क्षेत्र से आई महिला नीतू सेन के आंचल में गठान थी, जिसके ऑपरेशन के लिए पति व बच्चों के संग डेढ़ महीने से भटक रही थी। एक पैर से दिव्यांग नीतू सेन ने बताया कि वह जीएमसी हॉस्पिटल गई थी, जहां ओटी चालू नहीं होने की कहकर लौटा दिया। पोहरी बस स्टैंड क्षेत्र के दो प्राइवेट हॉस्पिटल वालों ने ऑपरेशन के 8-8 हजार रुपए मांगे। गरीबी के चलते इतने पैसे नहीं थे। बाद में जिला अस्पताल आई, जहां डॉ. पीके खरे ने ऑपरेशन कर दिया। अब नीतू को राहत है।

कोशिश कर रहे हैं कि 15 अगस्त से ओटी शुरू करा दें

ओटी शुरू करने के लिए जर्मनी से लाइट्स के कुछ पार्ट्स आने हैं लेकिन वहां लॉकडाउन लग गया। फिर भी हम कोशिश कर रहे हैं कि 15 अगस्त से ओटी शुरू करा दें। हालांकि हमने कैंसर, टीबी के मरीजों के लिए 1 अगस्त से भर्ती करने की तैयारी शुरू कर दी है। -डॉ. अक्षय कुमार निगम, डीन, मेडिकल कॉलेज शिवपुरी

दो उदाहरण... ग्वालियर रैफर घायल ने रास्ते में ही दम ताेड़ दिया

  • 1. 23 जुलाई 2021 को कल्लो जाटव (25) निवासी संजय कॉलोनी शिवपुरी ने घर पर फिनायल पी लिया। गंभीर हालत में जिला अस्पताल से ग्वालियर रैफर कर दिया जबकि साढ़े चार किमी दूरी पर ही शासकीय मेडिकल कॉलेज है लेकिन यहां सुविधा नहीं होने से कल्लो को ग्वालियर ले जाने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं था।
  • 2. 21 जुलाई 2021 को सड़क हादसे में गंभीर घायल दीपेश राठौर (25) निवासी मुरैना को जिला अस्पताल से ग्वालियर रैफर कर दिया गया। ग्वालियर पहुंचने से पहले ही रास्ते में दीपेश ने 15 किमी दूर सतनवाड़ा पर दम तोड़ दिया। यदि जीएमसी में सुविधा होती तो रैफर मरीज की जान बच सकती थी। ऐसे कई मामले सामने आते रहते हैं।

114 किमी दूर ग्वालियर तक दो घंटे का सफर, मेडिकल काॅलेज अस्पताल मात्र 4.50 किमी दूर जिला अस्पताल से रैफर करने पर मरीजों को 114 किमी का सफर तय करके ग्वालियर तक ले जाना पड़ रहा है। इस बीच अधिकतर गंभीर मरीज रास्ते में ही हिम्मत हार जाते हैं जबकि मेडिकल काॅलेज अस्पताल महज 4.50 किमी दूर है। ग्वालियर पहुंचने में दो घंटे का वक्त लगता है और जीएमसी पहुंचने में महज दस से पंद्रह मिनट ही लगते हैं।

जिला अस्पताल से दूरी बनाई लेकिन निजी अस्पताल में ऑपरेशन कर रहे जीएमसी के डॉक्टर: जिला अस्पताल की पांच मंजिला इमारत खाली करने के साथ ही जीएमसी हॉस्पिटल के अधिकारी, डॉक्टर व पूरा स्टाफ अपने नए हॉस्पिटल में आ गया है। जीएमसी प्रबंधन ने जिला अस्पताल से पूरी तरह पल्ला झाड़ लिया है लेकिन जीएमसी के डॉक्टर निजी हॉस्पिटलों में मरीजों का ऑपरेशन कर रहे हैं। इन ऑपरेशन के एवज में मोटी रकम वसूली जा रही है।

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