शिवपुरी, कई स्थानों पर ऐसा देखा गया है कि कुछ गैर सरकारी संगठन कोविड़ से अनाथ हुये बच्चों को गोद देने के संबंध में विज्ञापन कर रहे हैं। बहुत से लोग ऐसे बच्चों को गोद लेने अथवा देने के संबंध में सोशल मीड़िया पर भी मुहिम चला रहे हैं। जबकि इस तरह के बच्चों को गोद देने के संबंध में भारत सरकार द्वारा एक कानूनी प्रक्रिया बनायी गयी है। कोई व्यक्ति अथवा संस्था जो वैधानिक प्रक्रिया अपनाये बिना ऐसे निराश्रित बच्चे को गोद देता या लेता है तो उनको 03 साल का कारावास या एक लाख रूपये के जुर्माने की सजा हो सकती है।
महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री देवेन्द्र सुन्दरियाल ने बताया कि किशोर न्याय कनून के तहत ऐसे बच्चों को देखेरख और संरक्षण का जरूरतमंद बालक घोषित कर अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार गोद देने की कार्यवाही के लिये बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिये। गोद लेना और देना एक कनूनी प्रक्रिया है, जिसका पालन किया जाना अनिवार्य है। गोद लेने व देने के लिये संपूर्ण भारत मे केन्द्रीय दत्तक ग्रहण अधिकरण (कारा) के माध्यम से ही बच्चे गोद दिये जाते हैं।
जन सामान्य से अपील की जाती है कि यदि वे बच्चा गोद लेना चाहते हैं तो कारा के पोर्टल पर अपना पंजीयन करावें तथा आस-पास कोई ऐसा बच्चा है जिसके माता पिता की मृत्यु हो गई है तो उसकी जानकारी जिला प्रशासन अथवा चाइल्ड लाइन 1098 को आवश्यक रूप से दें। बाल अधिकार संरक्षण आयोग को अनेकों ऐसी शिकायतें प्राप्त हुई है जिसमें ऐसे बच्चों को अशासकीय व्यक्ति एवं संगठनों द्वारा गोद लेने अथवा देने के संबंध में भ्रामक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। कानून में इस प्रकार के प्रचार-प्रसार तथा अवैधानिक दत्तक ग्रहण को दण्डनीय अपराध माना गया है।

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