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निर्दलीय MLA शेरा ने पत्नी के लिए दावेदारी ठोंक बढ़ाई मुश्किल; नाराज अरुण यादव बैठक में नहीं आए, कमलनाथ बोले- सर्वे के बाद तय होंगे कैंडिडेट

 



कांग्रेस में उप चुनाव के लिए उम्मीदवारों के चयन के लिए मंथन चल रहा है। प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने गुरुवार को बैठक बुलाई थी। इसके बाद खंडवा लोकसभा सीट पर पेंच फंस गया है। बुरहानपुर से निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह शेरा ने यहां से पत्नी के लिए दावेदारी जताकर पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दरअसल, पूर्व मंत्री अरुण यादव यहां से टिकट मिलना तय मान रहे हैं। यही वजह है कि वे पिछले कई दिनों से लोकसभा क्षेत्र में प्रचार कर रहे हैं।

  

कमलनाथ के बयान से साफ हो गया है कि अरुण यादव की दावेदारी फिलहाल पक्की नहीं है। कमलनाथ ने कहा कि उप चुनाव में उम्मीदवारों के चयन का आधार सर्वे रिपोर्ट होगा। यही मांग बैठक में शेरा ने रख दी है। इससे नाराज अरुण यादव बैठक में नहीं पहुंचे, जबकि प्रदेश प्रभारी मुकुल वासनिक बैठक के लिए विशेष रूप से दिल्ली से भोपाल आए थे। निर्दलीय विधायक शेरा ने दावा किया है, खंडवा सीट पर यदि कोई सर्वे होता है, तो उनकी पत्नी के पक्ष में जीताऊ रिपोर्ट आएगी। ऐसे में पार्टी को उनकी पत्नी को टिकट देना चाहिए।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि शेरा ने बैठक के एक दिन पहले बुधवार को कमलनाथ को अपनी मंशा से अवगत करा दिया था। इसके बाद अरुण यादव ने भी कमलनाथ से मुलाकात की थी। बताया जाता है, शेरा की पत्नी के लिए टिकट की दावेदारी करने से यादव नाराज हो गए हैं, इसलिए वे गुुरुवार की बैठक में नहीं आए। इससे पहले कमलनाथ बयान दे चुके हैं कि अरुण यादव ने अभी तक चुनाव लड़ने की मंशा से अवगत नहीं कराया है। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी मुकुल वासनिक ने भी कहा कि उम्मीदवार के बारे में स्थानीय नेताओं का फीडबैक लिया जाएगा।

सर्वे के आधार पर होगा उम्मीदवारों का चयन
दरअसल, सूत्रों के अनुसार कांग्रेस सर्वे के आधार पर ही उम्मीदवारों का चयन करेगी। बताया जा रहा है, कांग्रेस ने उम्मीदवारों के चयन के लिए इसका काम भी शुरू कर दिया है। खंडवा से जहां अरुण यादव दावेदारी कर रहे हैं, तो पृथ्वीपुर सीट पर दिवंगत बृजेंद्र सिंह राठौर के बेटे नितेंद्र सिंह राठौर के नाम पर चर्चा है, जबकि जोबट और रैगांव सीट पर भी कई नेताओं ने दावेदारी जताई है।

जो जनता से सीधे जुड़ेगा, वही जीतेगा
कमलनाथ ने बैठक में कहा कि हमारा मुकाबला भाजपा से नहीं, बल्कि संगठन से है। आज की राजनीति परिवर्तनशील व स्थानीय हो चली है। बड़ी-बड़ी आम सभाओं और रैलियों का समय गया, अब तो बूथ पर व जनता से सीधे जुड़ने का समय है। इसका जनता से सीधा जुड़ाव होगा, उसकी जीत सुनिश्चित है। क्षेत्रों में मंडल-सेक्टर की इकाइयों में सभी योग्य, निष्ठावान लोगों का चयन हो, इस बात का विशेष ध्यान रखें।

कमलनाथ को निशाने पर ले चुके हैं अरुण यादव
अरुण यादव को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का करीबी माना जाता है। यादव ने कमलनाथ पर उस समय सवाल उठाए थे, जब ग्वालियर के हिंदू महासभा के पदाधिकारी बाबूलाल चौरसिया को कांग्रेस में शामिल कराया गया था। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा था- अपनी ही सरकार में कमलनाथ ने इन्हीं बाबूलाल चौरसिया और उनके सहयोगियों का ग्वालियर में गोडसे का मंदिर बनाने और पूजा करने के विरोध में FIR दर्ज करने का निर्देश दिया था, लेकिन अब उन्हें पार्टी में शामिल कराना उचित निर्णय नहीं है।

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