शिवपूरी डेढ़ साल बाद कक्षा छठवीं से आठवीं तक के विद्यालय बुधवार, एक सितंबर को खुले । 20 प्रतिशत बच्चे उत्साह में स्कूल में पढ़ने के लिए बस्ता टांग कर पहुंचे। लेकिन कुछ विद्यालयों में शिक्षकों ने गेट पर ही उनसे पालकों का सहमति पत्र मांग लिया, जिसके बाद वे घर चले गए और लौटकर स्कूल नहीं आए। वहीं शिक्षक स्कूल में गप लगाते नजर आए।
बता दें कि मार्च 2020 में कोरोना की पहली लहर में बंद हुए माध्यमिक विद्यालय एक सितंबर को सरकार के आदेश पर सशर्त खुले। 50 फीसदी बच्चों को पालकों की सहमति पर कक्षा में प्रवेश दिया जाना था। साथ ही कोविड- 19 प्रोटोकॉल का पूरा पालन भी कराना था। लेकिन जब भास्कर टीम ने बुधवार को शहर के कुछ सरकारी स्कूलों का जायजा लिया तो स्थितियां बहुत ही अजीब नजर आई। शहर के फतेहपुर स्थित शासकीय माध्यमिक विद्यालय में महज 10 बच्चे स्कूल में नज़र आए। विद्यालय के अध्यापक ने बताया कि उनके यहां बच्चे तो अधिक दर्ज हैं। लेकिन आज पहले दिन कम बच्चे आए। जब शहरी क्षेत्र में यह हाल है तो ग्रामीण क्षेत्रों में तो और बुरा हाल रहा कई स्कूलों के ना तो ताले खुले और ना ही वहां बच्चे पहुंचे।
पूरी क्षेत्र के स्कूलों में बच्चों को इसलिए वापस घर भेज दिया गया क्योंकि उनके पास पालकों सहमति पत्र नहीं था । इसलिए उन्हें सहमति पत्र का फार्मेट देकर पालक के हस्ताक्षर कराने के लिए दिया था। उसके बाद बच्चे लौटकर नहीं आए। सरकारी स्कूलों में न मास्क का इंतजाम था ना सेनेटाइजर का। शहरी क्षेत्र के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित होने वाली शासकीय स्कूलों में पहले दिन ना तो शिक्षकों ने अपने पास मास्क का इंतजाम रखा ना ही सैनिटाइजर का। कई छात्र तो बिना मास्क के ही स्कूल आ गए। ऐसे में इन छात्रों को हिदायत दी गई कि वह अगले दिन सहमति पत्र लेकर ही जाएं। जिससे कुछ छात्र वापस लौट गए। निजी स्कूलों में बच्चों की अधिक आवक रही, यहां कोरोना गाइडलाइन पालन के लिए पूरे इंतजाम देखे गए शहर के हैप्पी डेज स्कूल, एसपीएस स्कूल, किड्स गार्डन स्कूल और गीता पब्लिक स्कूल मैं पहले ही दिन बच्चों ने स्कूल आने में खासी रूचि दिखाई। खास बात यह है कि बच्चों को बेहतर ढंग से बिठाने के पूरे इंतजाम किए गए वही स्कूल परिसर में आते समय जहां पंक्ति बद्ध बच्चों को डिस्टेंस के साथ बैठाया गया। वहीं मास्कऔर सेनेटाइजर का विशेष रूप से ध्यान रखा गया।

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